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अवगति का अर्थ

अवगति अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. असफलताएं लगातार मिलने , प्रगति की दिशा में कदम न बढ़ पाने और अवगति के देर तक बने रहने का एक ही कारण है - अपने गुण , कर्म और स्वभाव में त्रुटियों का बाहुल्य होना, व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिष्कृत , परिपक्व न होना ।
  2. आपस में वोटों के चक्कर में सभी दल लड़ते रहे इसलिए हमारे देश की अवगति हुयी है , मगर अब हम ऐसा देश हित में नहीं करेंगे और देश हित के फैसले लेंगे और फैसलों पर अमल करेंगे , यह बात कोई भी दल नही कर रहा है ।
  3. 2 . अवक्षेपण - अवक्षेपण का अर्थ है नीचे की ओर फैकना, गिराव, अधःपात, नीचेकी ओर गिरना, नीचे कजाना, अधःपतन जिस कर्म के द्वारा वस्तु अथवा पदार्थ का अधोप्रदेश से संयोग होता है उसे अवक्षेपण कहते है, दूसरे शब्दों मेंइस हम अधोगतदि, अवगति, दुर्गति, दुर्दशा अथवा नरक गमन भी कह सकते है।
  4. 2 . अवक्षेपण - अवक्षेपण का अर्थ है नीचे की ओर फैकना , गिराव , अधःपात , नीचेकी ओर गिरना , नीचे कजाना , अधःपतन जिस कर्म के द्वारा वस्तु अथवा पदार्थ का अधोप्रदेश से संयोग होता है उसे अवक्षेपण कहते है , दूसरे शब्दों मेंइस हम अधोगतदि , अवगति , दुर्गति , दुर्दशा अथवा नरक गमन भी कह सकते है।
  5. 2 . अवक्षेपण - अवक्षेपण का अर्थ है नीचे की ओर फैकना , गिराव , अधःपात , नीचेकी ओर गिरना , नीचे कजाना , अधःपतन जिस कर्म के द्वारा वस्तु अथवा पदार्थ का अधोप्रदेश से संयोग होता है उसे अवक्षेपण कहते है , दूसरे शब्दों मेंइस हम अधोगतदि , अवगति , दुर्गति , दुर्दशा अथवा नरक गमन भी कह सकते है।
  6. फिर भी , क्योंकि यह एक पहल है और आलोचक साहित्य के लोकतंत्र का विश्वासी है और इस बात से अनभिज्ञ नहीं है कि यदि कविता कभी ख़त्म नहीं होती तो आलोचना भी, कितनी समर्थ क्यों न हो, अंतिम वाक्य नहीं होती, अतः अपनी इस प्रस्तुति की प्रवर्तन और दिशा-संकेत मानकर वह काव्यमर्मी विद्जनों के त्रेता-विषयक विवेचनात्मक परिणामों की अवगति के लिए समुत्सुक है।
  7. फिर भी , क्योंकि यह एक पहल है और आलोचक साहित्य के लोकतंत्र का विश्वासी है और इस बात से अनभिज्ञ नहीं है कि यदि कविता कभी ख़त्म नहीं होती तो आलोचना भी , कितनी समर्थ क्यों न हो , अंतिम वाक्य नहीं होती , अतः अपनी इस प्रस्तुति की प्रवर्तन और दिशा-संकेत मानकर वह काव्यमर्मी विद्जनों के त्रेता-विषयक विवेचनात्मक परिणामों की अवगति के लिए समुत्सुक है।
  8. उदाहरण के लिए मान लीजिये कि हमें विज्ञान के निर्धारित पाठ्यक्रमानुसार यह सिखाना है कि गर्मी से वस्तुएँ फैलती हैं और सर्दी में सिकुड़ती हैं और साथ ही मान लीजिए कि केन्द्रीय विषयों का कार्य करते हुए विद्यार्थी को यह बात सिखाने का अवसर सहज स् वाभाविक रूप से अपने आप अब तक प्रकट नहीं हुआ पर यह ज्ञान महत् वपूर्ण है और विद्यार्थियों को इसकी अवगति अवश्य होनी चाहिए और इसीलिए यह बात पाठ्क्रम में निर्धारित है।
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