असगुन का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- दिल्ली प्रवास की मेरी यादें कभी भी मधुर नहीं रहीं मगर मैं ऐसे सगुन असगुन वाले बातों पर विश्वास नहीं करता और हर बार पूरे उत्साह -उमंग के साथ दिल्ली जाता हूँ . ..
- फिल्म को देखने के बाद वापस पलटकर तार जोड़े जाएं , तो यह बात साफ हो जाती है कि शुरू में ही विदूषक को उल्टा टंगा दिखाकर बिमल राय मधुमती की मौत के असगुन को सेट कर चुके।
- शराफ मामा ने ' बड़ी बू कब तक आएगी ? ' पूछते हुए गालों से मेरा था हटाकर कोमल स् वर में कहा , ' इस तरह गालों पर हाथ रखकर नहीं बैठते , असगुन होता है ।
- शराफ मामा ने ' बड़ी बू कब तक आएगी ? ' पूछते हुए गालों से मेरा था हटाकर कोमल स् वर में कहा , ' इस तरह गालों पर हाथ रखकर नहीं बैठते , असगुन होता है ।
- मगर विध्वंस नव सृजन का सगुन तो नहीं यह तो है एक असगुन ही हम सृजन की बात करें . .केवल सृजन की ....अभी भी जीवन शेष है कुछ सृजन भी शेष है अभी वक्त नहीं आया क़यामत का ......
- उसने भी मंटू का साथ दिया , '' हाँ भाभी जी , त्योहार का दिन है , घर में बहू आई है , जमाई आया है , ऐसे समय भी कुछ नहीं पहना ! कलाई नंगी रहे तो असगुन लगता है।
- पेश है उनके दो रंग यह तुम थीं कर गयी चाक तिमिर का सीना जोत की फांक यह तुम थीं सिकुड़ गयी रग-रग बनाकर ठूंठ छोड़ गया पतझार उलंग असगुन सा खडा रहा कचनार अचानक उमगी डालों की संधि में छरहरी टहनी पोर-पोर मे
- पेश है उनके दो रंग यह तुम थीं कर गयी चाक तिमिर का सीना जोत की फांक यह तुम थीं सिकुड़ गयी रग-रग बनाकर ठूंठ छोड़ गया पतझार उलंग असगुन सा खडा रहा कचनार अचानक उमगी डालों की संधि में छरहरी टहनी पोर-पोर मे . ..
- पेश है उनके दो रंग यह तुम थीं कर गयी चाक तिमिर का सीना जोत की फांक यह तुम थीं सिकुड़ गयी रग-रग बनाकर ठूंठ छोड़ गया पतझार उलंग असगुन सा खडा रहा कचनार अचानक उमगी डालों की संधि में छरहरी टहनी पोर-पोर में गसे थे टूसे यह तुम थीं झुका रहा डालें फैलाकर कगार पर खडा कोढी गूलर ऊपर उठ आयी भादों की तलैया जुडा गया बौने की छाल का रेशा-रेशा यह तुम थीं।