आलथी-पालथी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- यह खाना खालिस देसी लोगों के लिये है ( ना तो छुरी काँटे से खाया जा सकता है ना चम्मच से , सिर्फ़ भगवान के दिये हाथों से ही ) , पाचक भी तभी है जब आलथी-पालथी मार कर , पंगत में बैठकर , हाथ पर लगे शुद्ध घी को स्वाद लेकर खाया जाये।
- कुछ लोग कह रहे हैं , यह नाटक है | मान लिया कि यह नाटक है तो आपको किसने रोका है ? आप भी यह नाटक क्यों नहीं करते ? किसी गरीब के झोपड़े में आप दो-चार रातें क्यों नहीं बिताते ? किसी किसान के घर आलथी-पालथी मारकर आप टिक्कड़ क्यों नहीं चबाते ? हेंड पंप से पानी खींचकर खुले में आप क्यों नहीं नहाते ?
- कार्यस्थल से प्रतिदिन लिलियन कार्टर चार बार एक किलोमीटर तक भ्रमण करती हुईं , उपनगरीय ट्रेनों के खचाखच भरे ट्रेन केदूसरे दर्जे के डिब्बों में यात्रा , हर शाम घर जाकर खाना बनाना , शादियों और नवजोत में जाना , हर हफ्ते स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में जाना , फर्श पर आलथी-पालथी मारकर बैठकर भोजन करना , दवा प्रतिनिधियों से मुफ्त के नमूने लेना , यह कहते हुए कि हां , मैं अमेरिका में मिस्टर पार्क एंड मिस्टर डेविस को जानती हूं।
- सोनियाजी विदेशी मूल की हैं , इसीलिए वे खौलता हुआ दूध हैं | उनके अनुभव और उनकी अनुभूतियॉं राजीव गॉंधी जितनी भी नहीं हैं | इसमें शक नहीं कि उनकी चमड़ी के रंग के अलावा उनका सब कुछ भारतीय दिखाई पड़ता है | जी हॉं , भारतीय | साड़ी , हिन्दी , नमस्ते , गंगा में डुबकी , माथे पर तिलक , दाल-रोटी का भोजन , आलथी-पालथी मारकर बैठना - यह सब कुछ भारतीय है | लेकिन यह सब कुछ क्या बहिरंग नहीं है ?
- सोनियाजी विदेशी मूल की हैं , इसीलिए वे खौलता हुआ दूध हैं | उनके अनुभव और उनकी अनुभूतियॉं राजीव गॉंधी जितनी भी नहीं हैं | इसमें शक नहीं कि उनकी चमड़ी के रंग के अलावा उनका सब कुछ भारतीय दिखाई पड़ता है | जी हॉं , भारतीय | साड़ी , हिन्दी , नमस्ते , गंगा में डुबकी , माथे पर तिलक , दाल-रोटी का भोजन , आलथी-पालथी मारकर बैठना - यह सब कुछ भारतीय है | लेकिन यह सब कुछ क्या बहिरंग नहीं है ?
- ' ' '' अरे यहाँ तो डिबेट शुरू हो गया , मेरी कहानी कौन सुनेगा ? '' '' हाँ तो मैं बता रही थी मीडिया मेरा स्वप्निल संसार था , और जब उसके असली रंग सामने आए ... '' रूप अब तकिया छोड सीधी बैठ गई आलथी-पालथी मार कर , उसके चेहरे पर उत्सुकता का वही बचपन वाला पारदर्शी भाव था , मैं आज नदी के सहज प्रवाह सी बही जा रही थी , अपनी तमाम पारदर्शिता के साथ ताकि मेरी बच्चियाँ अपने प्रतिबिम्ब उसमें ढूंढ सकें और अपने जीवन प्रवाह सही दिशा में मोड सकें।