इन्द्रद्युम्न का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- राजा इन्द्रद्युम्न के दूत को कबीले के सरदार ने बताया था कि राजा आयेंगे भी तो दर्शन नहीं होंगे क्यों कि ‘यम ' से किये वादे के अनुसार तब तक ‘नीलमाधव' रेत में विलीन हो जायेंगे।
- कौन थे यह पुरुषोत्तम ? पुराण कहते हैं कि एक राजा इन्द्रद्युम्न को स्वप्न में यह संकेत मिला कि पुरी तट पर स्वयं भगवान विष्णु स्थापित हैं जिनके दर्शनमात्र से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
- पहली कहानी में श्रीकृष्ण अपने परम भक्त राज इन्द्रद्युम्न के सपने में आये और उन्हे आदेश दिया कि पुरी के दरिया किनारे पर पडे एक पेड़ के तने में से वे श्री कृष्ण का विग्रह बनायें।
- किन्तु भगवान जगन्नाथ ने एक रात सपने में राजा इन्द्रद्युम्न को दर्शन दिया और कहा कि महासागर के तट पर लकड़ी का एक टुकड़ा मिलेगा , जिससे श्रीकृष्ण , बलराम , और सुभद्रा की मूर्तियाँ बनवा लेना।
- राजा इन्द्रद्युम्न के ऐतिहासिक रूप की पहचान हो चुकी है और नरसिंहदेव तो इतिहासपुरुष हैं ही . .. ...यायावर मिहिर के साथ व्यस्त है, उन दोनों को व्यस्त रहने दीजिये क्यों कि इतिहास तो खुल कर अब आया है सामने!
- कूर्मावतार के ही प्रसंग में लक्ष्मी की उत्पत्ति और महात्म्य , लक्ष्मी तथा इन्द्रद्युम्न का वृत्तान्त, इन्द्रद्युम्न के द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति, वर्ण, आश्रम और उनके कर्तव्य वर्णन तथा परब्रह्म के रूप में शिवतत्त्व का प्रतिपादन किया गया है।
- कूर्मावतार के ही प्रसंग में लक्ष्मी की उत्पत्ति और महात्म्य , लक्ष्मी तथा इन्द्रद्युम्न का वृत्तान्त, इन्द्रद्युम्न के द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति, वर्ण, आश्रम और उनके कर्तव्य वर्णन तथा परब्रह्म के रूप में शिवतत्त्व का प्रतिपादन किया गया है।
- राजा इन्द्रद्युम्न के दूत को कबीले के सरदार ने बताया था कि राजा आयेंगे भी तो दर्शन नहीं होंगे क्यों कि ‘ यम ' से किये वादे के अनुसार तब तक ‘ नीलमाधव ' रेत में विलीन हो जायेंगे।
- कूर्मावतार के ही प्रसंग में लक्ष्मी की उत्पत्ति और महात्म्य , लक्ष्मी तथा इन्द्रद्युम्न का वृत्तान्त, इन्द्रद्युम्न के द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति, वर्ण, आश्रम और उनके कर्तव्य वर्णन तथा परब्रह्म के रूप में शिवतत्त्व का प्रतिपादन किया गया है।
- कूर्मावतार के ही प्रसंग में लक्ष्मी की उत्पत्ति और महात्म्य , लक्ष्मी तथा इन्द्रद्युम्न का वृत्तान्त, इन्द्रद्युम्न के द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति, वर्ण, आश्रम और उनके कर्तव्य वर्णन तथा परब्रह्म के रूप में शिवतत्त्व का प्रतिपादन किया गया है।