कलेऊ का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- तू छोटे-छोटे आदमियों से लड़ती फिरती है , किसकी पगड़ी नीची होती है बता ! ( एक लात और जमा कर ) हम तो वहाँ कलेऊ की बाट देख रहे हैं , तू यहाँ लड़ाई ठाने बैठी है।
- खड़ा शीश पर नौटंकी का कालू - * खड़ा शीश पर नौटंकी का कालू *** * श्यामनारायण मिश्र *** कोई दिन हो गया कलेऊ कोई दिन ब्यालू बूढ़ी चाची कहती बेटे सबके राम दयालू सोच-सोचकर हुआ अजीरन मन है . ..
- प्रजापति बाबू गाँव घर की प्रतिक्रिया पूछ ही रहे थे कि अन्दर से उर्मिला देवी की आवाज़ आयी , ' हे सोगारथ ! भीतरी आ के पहले कलेऊ खा ले !' सोगारथ बगल में लगे ढेर से केला-पत्ता का दो टुकड़ा उठाया और आंगन को चला गया।
- धेरे-२ बहु थकने लगी और खेत के बीच में रखे कलेऊ की डलिया देखकर वह कुल कुला थी ! रहा ना गया उससे और सास से कहने लगी, कलेऊ खा लेते है पर सास बहु की भूख प्यास की परवाह किये बिना कहने लगी! ठहर . जा. बहु फिर लाचार ..
- धेरे-२ बहु थकने लगी और खेत के बीच में रखे कलेऊ की डलिया देखकर वह कुल कुला थी ! रहा ना गया उससे और सास से कहने लगी, कलेऊ खा लेते है पर सास बहु की भूख प्यास की परवाह किये बिना कहने लगी! ठहर . जा. बहु फिर लाचार ..
- उसने अपने परिवार की मान मर्यादा एव इज्जत की दुहाई देते हुए अपने बहु को राजी कर लिया ! योजना यह थी की दुसरे दिन सुबह पौ फटते ही दोनों खेत में जायंगे खेत में अलग-२ हिस्सों में गुडाई करंगे ! कलेऊ (दिन का खाना) खेत में बीच में रख दिया जायेगा और
- उसने अपने परिवार की मान मर्यादा एव इज्जत की दुहाई देते हुए अपने बहु को राजी कर लिया ! योजना यह थी की दुसरे दिन सुबह पौ फटते ही दोनों खेत में जायंगे खेत में अलग-२ हिस्सों में गुडाई करंगे ! कलेऊ (दिन का खाना) खेत में बीच में रख दिया जायेगा और
- बिसअ भूक बी लग्याई , सुबअ थोड़ो सो कलेऊ कर्र आयौ।' 'बैठ भाई, थोड़ी देर में सचिन की मइयो रोटी लेर आती होयगी।' 'अरे चलूँ भाई, अमार हो रीय!' जब गबरू उसके हाथ का पानी नहीं पी सकता था तो उसके घर की रोटी कैसे खा सकता था! 'कोई बात नी भैया, जिसी तेरी मरजी!
- बीच में मिटटी का चबूतरा बनाकर कर कलेऊ की डलिया रख दी गयी और दोनों उस खेत के अलग-२ सिरे से गुडाई करने लगे ! अलग-२ चोरो से गुडाई शुरू हो गयी पर किसे पता था आज का दिन कैसा होगा ! दोपहर की तेज धूप भूख प्यास से बहु का मुह उतर गया !
- पता चला कि प्रियजन मेरा रूठना देखना चाहते थे ( शादी में दामाद जी घड़ी तक के लिए नहीं रूठे थे ; कलेऊ में हमने चीलगाड़ी यानी हवाई जहाज माँगा था ; वरना उन्होंने तो पहले ही तय कर रखा था कि नामकरण दामाद जी ही करेंगे और जो नाम वह रखेंगे वह सबको स्वीकार्य होगा ) .