खूँट का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- मुझे याद आ रहे थे , सिरिसिया सरेह में अगहन में धान काटने के बाद खेतों में धान के अकेले खूँट और उन्हें देखकर श्री रामदयाल पांडेय जी की कविता जो उन्होंने कटे खेतों को देखकर लिखी थी - उजड़ दयार या चमन कहूँ ? ओ बसुंधरे ! इस परिवर्तन को , निधन कहूँ या सृजन कहूँ ?
- कोई नाम था हज़ारों नामों में से मुझे भा गया बचपन में मैंने केशों में गूंथा जब किशोरी हुई बड़े चाव से लॉकेट में पिरोया पहन लिया और बड़ी होने पर होश जो आया मन की हर खूँट पै लिख लिया बस वो एक नाम सोते - जागते कभी भूलता नहीं ‘ गोदना ' गुदा रोम - रोम पै लिखा वो …
- बड़े होना जल्दी-जल्दी बेटा ! - अभी -अभी देकर गई है दाई यह खुशखबरी कि- बेटा! तुम आ गए हो अपनी माँ के आँसुओँ से भिगो-भिगो कर छापे गए खुशबूदार फूलों वाले गीले- गीले आँचल में माँ से सुना है कि तू घर भर में सुन्दरतम है हो भी क्यों न उसके बेटे का बेटा है जो मैंने दाई को छुप के कुछ देते हुए देखा है उसे उसके आँचल के खूँट की ऐंठन बता रही है उसकी चोरी
- - ' ' राधा और रुक्मिणी स्नान को चली हैं , पर गंगाजी सूख गयी हैं , यह पापहरा नदी मृत हो चुकी है , चारों ओर बालू की रेती है , चारों ओर तृषा ही तृषा है , अटवी-कन्या रो रही है , बटोही की वधू रो रही है , मुँह पर रूमाल रखकर बेचारा निषाद रो रहा है कि उसकी बोझी नौका अब अगम हो गयी ! '' फिर गीत आगे चलता है और राधा अपने आँचल की खूँट में बँधी सात फूल लौंग रुक्मिणी को देती हैं।