जगण का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- पाठ ६ में बताया गया अगला नियम - ( ' पहले तथा तीसरे चरण के आरम्भ में जगण = जभान = १२१ का प्रयोग एक शब्द में वर्जित है किंतु
- हिंदी में जैसे नगण , सगण , जगण , भगण , रगण , तगण , यगण , मगण होते हैं वहीं सब कुछ उर्दू में भी चलता है ।
- हिंदी में जैसे नगण , सगण , जगण , भगण , रगण , तगण , यगण , मगण होते हैं वहीं सब कुछ उर्दू में भी चलता है ।
- राज भी पलट गया” शाहनी ने कांपता हुआ हाथ शेरे के सिर पर रक्खा और रुक-रुककर कहा”तैनू भाग जगण चन्ना ! ” (ओ चा/द तेरे भाग्य जागें) दाऊद खां ने हाथ का
- जगण ( सं . ) [ सं-पु . ] ( काव्यशास्त्र ) पिंगल में एक गण जिसमें मध्य का अक्षर गुरु और आदि तथा अंत के अक्षर लघु होते हैं।
- अभी तक मई दोहे के प्रारम्भ जगण से होने पर दोष मानता आया हूँ | दोहा विशेषांक “बाबूजी का भारत मित्र” में भी जगण से प्रारंभ करने को दोष युक्त माना… " 17
- अभी तक मई दोहे के प्रारम्भ जगण से होने पर दोष मानता आया हूँ | दोहा विशेषांक “बाबूजी का भारत मित्र” में भी जगण से प्रारंभ करने को दोष युक्त माना… " 17
- इस छंद की परिभाषा है - “ स्यादिन्द्रवज्रा यदि तौ जगौ गः ” अर्थात् इन्द्रवज्रा के प्रत्येक चरण में दो तगण , एक जगण और दो गुरु के क्रम से वर्ण होते हैं।
- सूर्य ( 12) और अश्व (7) पर जिसमें यति होती है और जहाँ वर्ण मगण, सगण, जगण, सगण, तगण, तगण और एक गुरु के क्रम से रखे जाते हैं, वह शार्दूलविक्रीडित छन्द होता है;
- विषम चरणों के अन्त में जगण I S I का प्रयोग वर्जित माना जाता है तथा सम चरणों के अन्त में मगण I S S या यगण S S S का प्रयोग होना चाहिए।