जड़ जगत का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- परमात्मा अनादि और अजन्मा है , परंतु मनुष् य , इतर जीव-जंतु तथा जड़ जगत क्या है ?
- यह दिखाई देने वाला जड़ जगत जिसमें हमारा शरीर भी शामिल है यही अन्न से बना शरीर अन्नरसमय कहलाता हैं।
- यह दिखाई देने वाला जड़ जगत जिसमें हमारा शरीर भी शामिल है यही अन्न से बना शरीर अन्नरसमय कहलाता हैं।
- जड़ जगत के विभक्त या कार्यरूप में परिणत होने पर उसका एक अंश अन्य अंश से पृथक हो जाता है
- हमारे प्राचीन मनीषी इस तथ्य से भली-भाँति परिचित थे कि जड़ जगत यानी भूमि , जल, पहाड़, वायु, वनस्पतियों, वन्यजीव, न..
- ये जड़ जगत है . पदार्थ यहाँ है सबकु छ.व ो सब मर्त्य है यानि सबकी समाप्ति होना अवश्यम्भावी है .
- वह सौंदर्य के कारक तत्वों की तलाश में इस जड़ जगत में उपलब्ध हर सुंदरता का तन-मन से छिद्रान्वेषण करता है।
- यह प्राण ही है जिसके अवतरण से जड़ जगत में हलचल हुई और द्रुत गति से आकार-प्रकार का युग प्रारम्भ हुआ।
- जीवन सामयिक रूप में ( शरीर यात्रा के दौरान) जड़ जगत की उपयोगिता को स्वीकारता है, और स्वयं भी उसके लिए पूरक होता है।
- किन्तु मानव तो जड़ विहिन प्राणी है यदि वह अपनी जड़ें जमाने लगा तो उसमें और जड़ जगत में अन्तर क्या रह जायेगा ।