जपजी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- आदि गुरु श्री नानकजी साहिब जपजी के माध्यम से कहते हैं - चाह के साथ यदि तूं तीर्थ स्नान करनें जा रहा है , तो वह बेकार है ......
- आगे आप को मिलेगा श्री जपजी साहिब , उम्मीद है आप जपजी साहिब के माध्यम से आदि गुरु नानक जी साहिब के प्रसाद को प्राप्त करनें में सफल होंगे ।
- आगे आप को मिलेगा श्री जपजी साहिब , उम्मीद है आप जपजी साहिब के माध्यम से आदि गुरु नानक जी साहिब के प्रसाद को प्राप्त करनें में सफल होंगे ।
- जपजी साहिब का मूलमंत्र उनके लिए है जो परमं प्रीति में डूब रहे हैं , जिनके पास हाँ ही हाँ है , जो ना की भाषा जानते ही नहीं ।
- इस मौके पर मलकीत सिंह , हरभजन सिंह, जपजी सिंह, जगमोहन सिंह, सरूप सिंह, बलवंत सिंह, जितेंद्र सिंह जगदीप सिंह, निर्मल सिंह व बलजिंद्र सिंह सहित भारी संख्या में संगत मौजूद रहीं।
- जपजी साहिब का मूल मंत्र बैराग्य की ऊर्जा भरता है एक ओंकार सत नाम , करता पुरुष , अकाल मूरत , अजुनी इन शब्दों के भावों में कौन बहता है ?
- हालांकि मुझे बहुत धमरालु किस्म का व्यक्ति नहीं कहा जा सकता , लेकिन मैंने जपजी साहिब और बारां माह का अनुवाद किया है और सिख समुदाय द्वारा भी मुझे स्वीकार किया जाता है।
- अजुनी आदि गुरु श्री नानकजी साहिब द्वारा अलमस्ती में गाया गया जपजी का मूल मंत्र छोटे - छोटे चौदह सूत्रों की जप माला है और जिसकी सातवीं मणि है - अजुनी ।
- 42 - 2 . 44 , 12.3 - 12.4 ] , गीता की यह बात जो कह रही है वही बात जपजी मंत्र एक में , आदि गुरु श्री नानकजी साहिब कह रहे हैं ।
- जपजी साहिब का अकाल मूरत एक द्रष्टा एवं साक्षी है जो निराकार है और जिस से एवं जिसमें सब होनें वाले हो - हो कर उसमें ही बिलीन भी होते रहते हैं ।