जपी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- योगी गोरखनाथ बाबा आप हरिनारायण अवतार -अवतारी पूर्ण ब्रम्ह हो आप के गुरु पूर्ण तपी जपी कवी नारायण अवतार मछेंद्र नाथजी है उनके गुरु ब्रम्ह्हा विष्णु महेष जो समस्त सृष्टि के रूप में येकोहं एको देवाः जन्म जीवन मृत्यु के अधिपति है तीनो देवो के एकरूप अवतार सिद्ध सिद्धेश्वर श्री
- अमोल बटरोही की एक कविता का उनमान देखें- ‘ गैंती गोठाइ जाइ , भुंइ जाक मारि जाय , हम खनी जब जेठ कइ दुपहरी लजाइ जाय / नपिया जो आइ जाइ , लट्ठा लगाइ जाइ , चारि सइका खंती तीन सइका बताइ जाइ / तऊ संतोस करी , राम जपी घरी घरी / ' संतुष्टि का यह भाव वरेण्य है।
- किशोर का गाया फूलों के रंग से और धीरे से जाना खटियन में , लता का गाया राधा ने माला जपी श्याम की और रंगीला रे, रफी का गाया लिखे जो खत तुझे और मन्ना डे का गाया ऐ भाई जरा देख के चलो ए कुछ ऐसे गीत इस फनकार ने लिखे हैं जो वक्त की बंदिशों से परे जा चुके हैं।
- ' ' जैसी राधा ने माला जपी श्याम की '' ठीक वैसे ही उनकी संगिनी ने जपी उनके लिए 1938 में उनकी शागिर्द मीरा दास गुप्ता सचिन दादा के जीवन में प्रवेश की मीरा दास की अहम भूमिका रही सचिन दा के जीवन में उनके संगीत निर्देशन https://www.youtube.com/watch? v = efeDjIA 9 nYI में गीत गया और सहायक संगीत निर्देशिका के रूप में सहयोग करना |
- ' ' जैसी राधा ने माला जपी श्याम की '' ठीक वैसे ही उनकी संगिनी ने जपी उनके लिए 1938 में उनकी शागिर्द मीरा दास गुप्ता सचिन दादा के जीवन में प्रवेश की मीरा दास की अहम भूमिका रही सचिन दा के जीवन में उनके संगीत निर्देशन https://www.youtube.com/watch? v = efeDjIA 9 nYI में गीत गया और सहायक संगीत निर्देशिका के रूप में सहयोग करना |
- अभी तक भले ही कांग्रेस उनके बारे में कहती रही हो कि वे मोदी को बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं और मोदी उनके लिए कोई चुनौती नहीं हैं लेकिन सोमवार को जहां एक ओर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मोदी नाम की माला जपी तो कांग्रेसी महासचिव दिग्विजय सिंह और केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी कांग्रेस से बड़ा खतरा भाजपा के लिए हैं।
- इसके आगे मैं इतना और जोड़ना चाहूंगा कि विराट जीवन-जगत के सम्मुख आ पड़ने पर अपनी असहायता बोध की प्रामाणिकता के लिए जो यह रिवाज रहा है कि काफ्का से लेकर बैकेट तक के नामों की माला जपी जाए , उसकी अब कोई जरूरत नहीं है , क्योंकि खत्री जी ने तिलिस्म के कैदी की स्थिति का जैसा बखान किया है , वह किसी भी ' अजनबीपन ' को मूर्त करने में पर्याप्त कामयाब है .
- तुलसी अगर आज तुम होते देख हमारी काव्य-साधना बाबा तुम सिर धुनकर रोते तुलसी अगर आज तुम होते तुमने छंदों के चक्कर में बहुत समय बेकार कर दिया हमने सबसे पहले छंदों का ही बेडा पार कर दिया हम तो प्रगतिशील कवि हैं हम क्यों रहे छंदों को ढोते तुलसी अगर आज तुम होते . ... बाबा तुमपर मैटर कम था जपी सिर्फ़ राम की माला हमने तो गोबडौले से ले एटम बम तक पर लिख डाला हमको कहाँ कमी विषयों की हम क्यों रहे राम को ढोते तुलसी अगर आज तुम होते...