जह्नु का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- महाराज यह देख कर आश्चर्य में पड़ गये तब गंगा ने कहा , ” हे राजन् ! मैं जह्नु ऋषि की पुत्री गंगा हूँ * और आपसे विवाह करने की अभिलाषा ले कर आपके पास आई हूँ।
- गंगा का अवतरण तपस्वी जह्नु के यज्ञ के लिए घातक हुआ , जिससे क्रुद्ध होकर उस तापस ने गंगा को पी डाला और प्रार्थना के बाद उसने कान से गंगा की धारा निकाल दी, जिससे वह जाह्नवी कहलाई हैं।
- जह्नु ( सं . ) [ सं-पु . ] ( पुराण ) एक ऋषि जिन्होंने गंगा नदी का पान कर लिया था और राजा भगीरथ की प्रार्थना पर बाहर निकाल दिया था इसी कारण गंगा को जाह्नवी कहा गया।
- भागीरथ के रथ के पीछे दौड़ती-गंगा पहले-पहल जब सुल् तानगंज पहुँची , तब वह उस पहाड़ी पर स्थित जह्नु ऋषि के आश्रम को बहाकर ले जाने पर तुल गई , जिससे जह्नु ऋषि गुस् सा हो गए और चुल् लु में उठाकर गंगा को पी गए।
- भागीरथ के रथ के पीछे दौड़ती-गंगा पहले-पहल जब सुल् तानगंज पहुँची , तब वह उस पहाड़ी पर स्थित जह्नु ऋषि के आश्रम को बहाकर ले जाने पर तुल गई , जिससे जह्नु ऋषि गुस् सा हो गए और चुल् लु में उठाकर गंगा को पी गए।
- इक्कीसवीं शती के दसवें गणतंत्र दिवस पर -परशुराम रायदेश की संसद कीगंगोत्री से निकलीलोकहित की भागीरथीकिसकी जटा में खो गयी ? या कि कोई जह्नु आकरराह में ही पी गयाऔर लोकहितस्वार्थ की वैतरणी बहाकोई भगीरथ छल गया ? माना कि नवनिर्माण मेंधीरज भी कोई चीज हैपर पचासा
- स्वर्ग से उतरकर शिव की जटाओं से निकली गंगा जब जह्नु ऋषि के आश्रम से होकर निकली , तो वे उसको पी गये , एक हजार वर्ष तक वह उनके पेट में भटकती रही , फिर जह्नु ऋषि ने उसे छोड़ दिया , इसीलिए उसको जाह्नवी कहते हैं।
- स्वर्ग से उतरकर शिव की जटाओं से निकली गंगा जब जह्नु ऋषि के आश्रम से होकर निकली , तो वे उसको पी गये , एक हजार वर्ष तक वह उनके पेट में भटकती रही , फिर जह्नु ऋषि ने उसे छोड़ दिया , इसीलिए उसको जाह्नवी कहते हैं।
- पुरखों की सद्गति के लिए ही तो भगीरथ हिमशिलाओं के किसी ब्रह््म-कमंडल से निकालकर शिव-जटाओं तक और फिर उन महादेव की उलझी अलकों में अटकी इस महानदी को यानी जह्नु ऋषि की दुहिता जाह्नवी को इस भस्म हुई बंजरभूमि में अपने पुरखों एवं अपने पुण्य-प्रतााप से खींच लाए थे।