झुलनी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- उस तरह का है कि ; “ नई झुलनी की छैयां पिया दुपहरिया बिताइ ल हो ” . .. टाइप . पिया लोग भी लगे हुए हैं और नई झुलनी को राजस्थानी रजाई तक करार दे रहे हैं .
- बैगा आदिवासियों के करमा को बैगानी करमा कहा जाता है ताल और लय के अंतर से यह चार प्रकार का होता है | 1 ) करमा खरी 2 ) करमा खाय 3 ) करमा झुलनी ४ ) करमा लहकी |
- अच् छे कामवाला एक टूटा मटका , झुलनी नेकर में खुद की लफंगई में हारा लड़का , खूले में झुलस रहे कुछ रद्दी के समाचार , प् यास में पस् त व लम् बे इंतज़ारों में ध् वस् त शनै-शनै एक बेमतलब होता प् या र.
- अच् छे कामवाला एक टूटा मटका , झुलनी नेकर में खुद की लफंगई में हारा लड़का , खूले में झुलस रहे कुछ रद्दी के समाचार , प् यास में पस् त व लम् बे इंतज़ारों में ध् वस् त शनै-शनै एक बेमतलब होता प् या र.
- लखनऊ महोत्सव 2013 के चौथे दिन सास्कृतिक पंडाल में गाजीपुर के लोकगायक पारसनाथ यादव ने बिरहा के भाव में राह गीत , मेला गीत सुनाकर लोकजीवन की खिड़की खोल दी तो भोजपुरी गायक अजीत पाडे ने बारह मासा लोकगीत 'नई झुलनी के छइया बलम दोपहरिया दिलाय दा हो.'
- कौन सोचता है बुधिया और झुलनी कहां होंगें तब जिनके लिए नहीं बचा गांवों में भी कोई अकेला कोना जगमगाते होटलों के बीच तब खड़ा होगा एक राजप्रासाद , राजप्रासद का स्वप्न/ देखने वालों के लिए और हाय! चेहरे पर शान्त-स्निग्ध सी/ मुस्कुराहट लिए बुद्ध होगा राजप्रासाद का प्रहरी।
- नगर संवाददाता- ! -उदयपुर सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज संस्थान की ओर से जल झुलनी एकादशी पर समाज भवन से ठाकुरजी नरसिंह भगवान की सवारी शाम 5 बजे निकाली जाएगी। समाज के अध्यक्ष नरेश टोडावत ने बताया कि रामरेवाड़ी समाज भवन से शुरु होकर घंटाघर, जगदीश चौक होते हुए गणगौर घाट पहुंचेगी।
- एही ठैयां झुलनी हेरानी हो रामा ” जो इस उपन्यास के भाव और भाषा को बांधकर केंद्र बिंदु में निर्मल गंगा की लोल लहरों की तरह इठलाती हुई दिखाई देती है जिसमें बनारसी गौरहारिन दुलारी बाई बटलोही में चुरती हुई दाल को क्रोध में ठोकर मार कर गिरा देती है।
- वह उसे जगाती है होली के रंग में रंगने के लिए , किंतु वह जागता नहीं है तो वह गा उठती है- उड़ी-उड़ी कागा झुलनियां पर बैठे झुलनी का रसवा ले भागा मारे सईयां अभागा न जागा इस प्रकार हम देखते हैं कि होली प्रेम-त्याग का एक मनोहारी रूप है।
- कौन सोचता है बुधिया और झुलनी कहां होंगें तब जिनके लिए नहीं बचा गांवों में भी कोई अकेला कोना जगमगाते होटलों के बीच तब खड़ा होगा एक राजप्रासाद , राजप्रासद का स्वप्न / देखने वालों के लिए और हाय ! चेहरे पर शान्त-स्निग्ध सी / मुस्कुराहट लिए बुद्ध होगा राजप्रासाद का प्रहरी।