ढुंढा का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- जॉनने मोबाईलके तरफ देखते हूए बटन दबाते हूए कहा- “ यस सॅम” उधरसे आवाज आई ' ' सर , हमने उसे सब तरफ ढुंढा लेकिन वह हमें नही मिला.” “नही मिला.?.. उसके जानेमें और हमारे ढुंढनेमें ऐसा कितना फासला था? ....वह वही कही आसपास होना चाहिए था. '' जॉनने कहा. “सर... शायद उसने बादमें अपने कपडे बदले होगे..
- pmदिनेशराय द्विवेदी जी आप की बात सही है , कल कोई एडवन ही फ़ंस गया था, जिसे मै ढूंढ के हार गया, मेरे बच्चो ने भी खुब ढुंढा लेकिन मिला नही, लेकिन इस का हल ढूंढना ही पडॆगा, मेरे बच्चो ने अपने पीसी से हर चीज मिलाई फ़िर भी कामयाब नही हुये, चलिये अब जब काम चलता है चले फ़िर कोई अन्य उपाय देखेगे.आप सभी का धन्यवाद
- आप्के इस सुन्दर प्रयास के लिए मै आप्को धन्यवाद देति हु , हिन्दि साहित्य मै रुचि होने के कार्ण ये जीव्नि य जीव्नि का कुछ भाग पढ कर हि मुझे सागर मै से कुछ बुन्दो के मिल जाने क अनुभव हुआ और जिसे हिन्दि साहित्य के सागर मै डुब जाने कि इच्छा हो उस्के लिये ये बुन्दे भि मोति के समान है , जिन्हे सागर मै से ढुंढा गया है।
- बाद मे पीडित परिजनो ने जाकर क्षेत्राधिकारी - पिण्डरा से इस बाबत बात किये तब उन्होने कहा - जितना भी खर्च आयेगा मै करुंगा , तुम लोग कही लिखा पढी मत करना, दुसरी तरफ अगर कोई व्यक्ति पीडित से मिलने जाए तो चोलापुर पुलिस उसे कहते की कागज पर हस्ताक्षर कर दो, और इसका ईलज करवाओ, इसके लिए परिजनो को लगातार ढुंढा जा रहा है, जिससे परिजन भागे - भागे फिर रहे है!
- ( हर्ष , विषाद , उल्लास , उपालंभ , मान-अभिमान की काव्यात्मक कारगुजारियों से गुजरते हुए मैं यहां राही मासूम रज़ा और नीरज के शहरनामे के बहाने अपने उस शहरनामे को भी भीतर ही भीतर दोहरा लेना चाहता हूं जो पिछले कई सालों से लगातार लिखा जा रहा है ; बकौल अपने प्रिय शायर इब्ने इंशा- किसका-किसका हाल सुनाया तू ने ऐ अफसानागो हमने एक तुझी को ढुंढा इस सारे अफसाने में )
- यह मेरा अपना खुद का आकलन है - किसी समाजभाषाविद का नहीं . खै र. .. अब खिंचड़ी पर्व से जुड़े कुछ शब्दों की सूची बनाने का एक प्रयास - ढूँढ़ी , ढुंढा , तिलकुट , चाउर , फरुही , लावा , बतासा , आदी , बहँगी , नहान , सजाव दही , कहँतरी , अहरा , बोरसी , गोइंठा , कबिली , रहिला , लुग्गा , फींचल , कचारल , भरकल , झुराइल ......
- यह मेरा अपना खुद का आकलन है - किसी समाजभाषाविद का नहीं . खै र. .. अब खिंचड़ी पर्व से जुड़े कुछ शब्दों की सूची बनाने का एक प्रयास - ढूँढ़ी , ढुंढा , तिलकुट , चाउर , फरुही , लावा , बतासा , आदी , बहँगी , नहान , सजाव दही , कहँतरी , अहरा , बोरसी , गोइंठा , कबिली , रहिला , लुग्गा , फींचल , कचारल , भरकल , झुराइल ......
- अभी मैने दो गीत सुने है पहला- लता जी का , ए.आर.रहमान का संगीतबद्ध “ लुका छिपी बहुत हुई, सामने आ जा ना, कहाँ कहाँ ढुंढा तुझे थक गयी है तेरी माँ” और शंकर महादेवन का गाया-“ मै कभी बतलाता नही पर अंधेरे से डरता हूँ मै माँ” दोनो मर्मस्पर्शी गीत है जो माँ की महिमा का सही बखान करते है इनको सुनते ही आंखे बरबस नम हो जाती है और फिर कल्पनाशील मन भावनाओ के सागर मे तैरने लगता है और बहुत सुकुन मिलता है।
- चोलापुर सहित निजी अस्पताल शुभम मे भर्ती काराये और परिजनो से मिलने नही दिया गया ! बाद मे पीडित परिजनो ने जाकर क्षेत्राधिकारी - पिण्डरा से इस बाबत बात किये तब उन्होने कहा - जितना भी खर्च आयेगा मै करुंगा, तुम लोग कही लिखा पढी मत करना, दुसरी तरफ अगर कोई व्यक्ति पीडित से मिलने जाए तो चोलापुर पुलिस उसे कहते की कागज पर हस्ताक्षर कर दो, और इसका ईलज करवाओ, इसके लिए परिजनो को लगातार ढुंढा जा रहा है, जिससे परिजन भागे - भागे फिर रहे है!
- पुनः सायं काल के समय प्रसन्न मन से संपूर्ण पुरवासियों एवं गाजे-बाजे के साथ होली के समीप जा कर शुभासन पर पूर्व या उत्तर मुख हो कर बैठें और ‘ मम सकुटुंबस्य सपरिवारस्य प ुरग्र ा मस्थजनपदसहितस्य वा सर्वापच्छांतिप्रशमनपूर्वक- सकल शुभफल प्राप्त्यार्थं ढुंढा प्रीति कामनया होलिका पूजन करिष्ये ' यह संकल्प कर के पूर्णिमा प्राप्त होने पर अछूत या सूतिका के घर से बालकों द्वारा अग्नि मंगवा कर , होली को दीप्तिमान् करें और चैतन्य होने पर गंध , अक्षत , पुष्पादि से शोडषोपचार पूजन कर के ‘‘ असृक्पाभयसंत्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः।