दनु का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इस कथा को बांचते हुए अनायास ही भारतीय परिदृश्य वाली दनु कुलीन होलिका की याद आ जाती है , जोकि ज्वलनशीलता के विरुद्ध एक जादुई आंचल / प्रतिरोध का सामर्थ्य रखती है / उपहार / वरदान प्राप्त है !
- इस प्रकार महर्षि कश्यप की अदिति , दिति , दनु , काष्ठा , अरिष्टा , सुरसा , इला , मुनि , क्रोधवशा , ताम्रा , सुरभि , सुरसा , तिमि , विनता , कद्रू , पतांगी और यामिनि आदि पत्नियां बनीं।
- इस प्रकार महर्षि कश्यप की अदिति , दिति , दनु , काष्ठा , अरिष्टा , सुरसा , इला , मुनि , क्रोधवशा , ताम्रा , सुरभि , सुरसा , तिमि , विनता , कद्रू , पतांगी और यामिनि आदि पत्नियां बनीं।
- इस प्रकार महर्षि कश्यप की अदिति , दिति , दनु , काष्ठा , अरिष्टा , सुरसा , इला , मुनि , क्रोधवशा , ताम्रा , सुरभि , सुरसा , तिमि , विनता , कद्रू , पतांगी और यामिनी आदि पत्नियां बनीं।
- इस प्रकार महर्षि कश्यप की अदिति , दिति , दनु , काष्ठा , अरिष्टा , सुरसा , इला , मुनि , क्रोधवशा , ताम्रा , सुरभि , सुरसा , तिमि , विनता , कद्रू , पतांगी और यामिनी आदि पत्नियां बनीं।
- इसी प्रकार दनु से दानव; विनता से गरुड़ और अरुण ; कद्रू से नाग , मुनि तथा गंधर्व ; रवसा से यक्ष और राक्षस; क्रोध से कुल्याएँ; अरिष्टा से अप्सराएं ; इरा से ऐरावत हाथी ; श्येनी से श्येन तथा भास , शुक आदि पक्षी उत्पन्न हुए।
- यह निश्चित हुआ कि असुरा गण दजला और फरात नदियों के बीच वाले समस्त भू-भाग पर अपना साम्राज्य स्थापित करें और दानव लोग जो जननी दनु की संतान थे , मध्य क्षेत्र की उस तीव्र गति से बहती हुयी नदी, जिसका नामकरण दनूब हुआ था के उस पार के समस्त भू-क्षेत्र पर अपना अधियत्य जमायें।
- कश्यप की पत्नी अदिति से आदित्य ( देवता), दिति से दैत्य, दनु से दानव, काष्ठा से अश्व आदि, अरिष्ठा से गंधर्व, सुरसा से राक्षस, इला से वृक्ष, मुनि से अप्सरागण, क्रोधवशा से सर्प, ताम्रा से श्येन-गृध्र आदि, सुरभि से गौ और महिष, सरमा से श्वापद (हिंस्त्र पशु) और तिमि से यादोगण (जलजंतु) की उत्पत्ति हुई।
- यह निश्चित हुआ कि असुरा गण दजला और फरात नदियों के बीच वाले समस्त भू-भाग पर अपना साम्राज्य स्थापित करें और दानव लोग जो जननी दनु की संतान थे , मध्य क्षेत्र की उस तीव्र गति से बहती हुयी नदी , जिसका नामकरण दनूब हुआ था के उस पार के समस्त भू-क्षेत्र पर अपना अधियत्य जमायें।
- महर्षि कश्यप को उनकी पत्नी दनु के गर्भ से द्विमुर्धा , शम्बर , अरिष्ट , हयग्रीव , विभावसु , अरूण , अनुतापन , धूम्रकेश , विरूपाक्ष , दुर्जय , अयोमुख , शंकुशिरा , कपिल , शंकर , एकचक्र , महाबाहु , तारक , महाबल , स्वर्भानु , वृषपर्वा , महाबली पुलोम और विप्रचिति आदि 61 महान् पुत्रों की प्राप्ति हुई।