पंचमुख का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- भगवान शिव के भक्त भगवान शिव की सदाशिव , परमात्मा प्रभु शिव , मंगलस्वरूप भगवान शिव , अर्द्धनारीश्वर भगवान शंकर , गौरीपति भगवान शिव , महामहेश्वर , पंचमुख सदाशिव , अम्बिकेश्वर , पार्वतीनाथ , भगवान पञ्चानन , महाकाल , श्री नीलकंठ , पशुपति , भगवान दक्षिणामूर्ति तथा महामृत्युंञ्जय आदि रूपों में आराधना करते हैं।
- भगवान शिव के भक्त भगवान शिव की सदाशिव , परमात्मा प्रभु शिव , मंगलस्वरूप भगवान शिव , अर्द्धनारीश्वर भगवान शंकर , गौरीपति भगवान शिव , महामहेश्वर , पंचमुख सदाशिव , अम्बिकेश्वर , पार्वतीनाथ , भगवान पञ्चानन , महाकाल , श्री नीलकंठ , पशुपति , भगवान दक्षिणामूर्ति तथा महामृत्युंञ्जय आदि रूपों में आराधना करते हैं।
- इस प्रकार हम देखते हैं कि पंच परमेश्वर ( ब्रह्मा, विष्णु, शिव, रवि और गणेश) केवल एक - एक तत्त्व के स्वामी हैं | पंचमुख शेष ही ऐसे हैं जो पञ्च प्रकृतियों को पृथ्वी के रूप में एक साथ धारण करते हैं | देखा जाये तो हम भारतीयों ने अपने प्राचीन ज्ञान को विस्मृत कर दिया है | विचार करने पर हम देखते हैं कि हमारी प्राचीन मान्यता अन्धविश्वास नहीं अपितु निर्विवाद सत्य है |
- यहाँ पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री राम जी को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था , तब प्रभु श्री राम को ढूँढ़ने के लिए हनुमान जी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारम्भ की थी | और फिर इसी रूप में उन्होंने उन अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था | यहाँ पर हनुमान जी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सारे दुस्तर संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है |
- यहाँ पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री राम जी को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था , तब प्रभु श्री राम को ढूँढ़ने के लिए हनुमान जी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारम्भ की थी | और फिर इसी रूप में उन्होंने उन अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था | यहाँ पर हनुमान जी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सारे दुस्तर संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है |