पनीला का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- संस्कृत में पान अर्थात ( पीना ) , पयस् ( जल ) , पयोधि ( समुद्र ) , और हिन्दी में पानी , प्यास , प्याऊ , परनाला , प्यासा , पिपासा , पनीला , पनघट , पनिहारिन , जलपान वगैरह कई शब्दों की पीछे संस्कृत की प या पा धातुएं ही हैं।
- संस्कृत में पान अर्थात ( पीना ) , पयस् ( जल ) , पयोधि ( समुद्र ) , और हिन्दी में पानी , प्यास , प्याऊ , परनाला , प्यासा , पिपासा , पनीला , पनघट , पनिहारिन , जलपान वगैरह कई शब्दों की पीछे संस्कृत की प या पा धातुएं ही हैं।
- उनींदेपन में धुंआ है उचटेपन में रोशनी के नश् तर होशमंदी ज् यादती हुए जाती है अकसर ख़ूब सारी होशमंदी , ख़ूब सारी हुशियारी ख़ूब हिसाबो-हरकत जबके हर हुशियारी के पीछे से झांकते हैं तरेरी-सी नज़रों वाले मुंह-अंधेरे के प्रेत जो रात के कुंए से पानी भरते हैं जो पानी के परदों पर काढ़ते हैं मूंगों के क़शीदे हरे को और गाढ़ा करते , बैंजनी को और पनीला नींद के ख़ामोश-ख़फ़ीफ़ दरिया के भीतर
- प्रदेश टुडे संवाददाता , अशोकनगर वैसे तो गर्मियों में दूध वालों की मर्जी चलती थी लेकिन दूध के अभाव में अब पूरे साल दूध वालों की मर्जी चलने लगी है , जिसके चलते दूध वाले अपनी मनमर्जी के अनुसार दाम बढ़ाकर दूध बेंच रहे हैं जबकि ग्राहक भी अच्छा दूध मिलने की चाह में दाम दे रहे हैं लेकिन इसके बाद भी ग्राहकों के हिस्से में पनीला और यूरिया मिला दूध ही आ रहा है।
- मुझे लगा यही तो हो रहा है कश्मीर के साथ . ..कश्मीरियत के साथ...वहां कैसे पनपेगी मोहब्बत...देश के लिए...भारत के लिए...उन संगीनों ने तो आपस में प्यार करने लायक भी नहीं छोड़ा है इंसानों को...श्रीनगर की खौफजदा सी गलियों में घूमते हुए टकराए वे नौजवान जाने क्यों अपने से नहीं लगते...उन आंखों में या तो बगावत दिखी या नफरत...मादा आंखों कुछ पनीला सा नजर आया था...ठीक-ठीक मालूम नहीं...मजबूरी थी शायद...इधर या उधर न हो पाने की मजबूरी...वे लोग हंसते हैं, खिलखिलाते हैं...लेकिन खुश नहीं हैं...गुस्सा हैं...कुछ भारत से, कुछ पाकिस्तान से और बाकी खुद से...
- मुझे लगा यही तो हो रहा है कश्मीर के साथ . ..कश्मीरियत के साथ...वहां कैसे पनपेगी मोहब्बत...देश के लिए...भारत के लिए...उन संगीनों ने तो आपस में प्यार करने लायक भी नहीं छोड़ा है इंसानों को...श्रीनगर की खौफजदा सी गलियों में घूमते हुए टकराए वे नौजवान जाने क्यों अपने से नहीं लगते...उन आंखों में या तो बगावत दिखी या नफरत...मादा आंखों कुछ पनीला सा नजर आया था...ठीक-ठीक मालूम नहीं...मजबूरी थी शायद...इधर या उधर न हो पाने की मजबूरी...वे लोग हंसते हैं, खिलखिलाते हैं...लेकिन खुश नहीं हैं...गुस्सा हैं...कुछ भारत से, कुछ पाकिस्तान से और बाकी खुद से...