परपंच का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- तब लगता है ठगा गया हूँ मैं जीवन के लेन देन में , जब अयोग्य जुगनू सूरज के सिंहासन पर दिखता है, जब खोटा पत्थर का टुकड़ा कनक कणी सा बिकता है, जब शब्दों का मोल आँकने वाला मापक बहरा है, जब असत्य परपंच अनर्गल संभाषण ही टिकता है, मिलता है सम्मान उसी संभाषण क...
- जब अयोग्य जुगनू सूरज के सिंहासन पर दिखता है , जब खोटा पत्थर का टुकड़ा कनक कणी सा बिकता है, जब शब्दों का मोल आँकने वाला मापक बहरा है, जब असत्य परपंच अनर्गल संभाषण ही टिकता है, मिलता है सम्मान उसी संभाषण को श्लोकों सा, तब लगता है ठगा गया हूँ मैं जीवन के लेन देन में,
- जब अयोग्य जुगनू सूरज के सिंहासन पर दिखता है , जब खोटा पत्थर का टुकड़ा कनक कणी सा बिकता है, जब शब्दों का मोल आँकने वाला मापक बहरा है, जब असत्य परपंच अनर्गल संभाषण ही टिकता है, मिलता है सम्मान उसी संभाषण को श्लोकों सा, तब लगता है ठगा गया हूँ मैं जीवन के लेन देन में,
- यदि भारत वर्ष की महिलाएं , घर के चबूतरे पर बैठकर गप-शप करें , चौके-चूल्हे में फूंकती रहे तो , झाड़ू-पोंछा करें , टेलिविज़न पर सास-बहु के सीरियल देखें , परपंच करें , किटी पार्टीस करें पति से अनावश्यक विवाद करें , या फिर घर वालों की सेवा में शाही पनीर बनाएं तो समय का सदुपयोग होता है ?
- यदि भारत वर्ष की महिलाएं , घर के चबूतरे पर बैठकर गप-शप करें , चौके-चूल्हे में फूंकती रहे तो , झाड़ू-पोंछा करें , टेलिविज़न पर सास-बहु के सीरियल देखें , परपंच करें , किटी पार्टीस करें पति से अनावश्यक विवाद करें , या फिर घर वालों की सेवा में शाही पनीर बनाएं तो समय का सदुपयोग होता है ?
- जब अयोग्य जुगनू सूरज के सिंहासन पर दिखता है , जब खोटा पत्थर का टुकड़ा कनक कणी सा बिकता है , जब शब्दों का मोल आँकने वाला मापक बहरा है , जब असत्य परपंच अनर्गल संभाषण ही टिकता है , मिलता है सम्मान उसी संभाषण को श्लोकों सा , तब लगता है ठगा गया हूँ मैं जीवन के लेन देन में ,
- हमारे ही एक रिश्तेदार है जो अपनी पत्नी को सबके सामने बेवकूफ जैसे समानार्थी शब्दों से संबोधित करते रहते है और वो महिला अन्य अपने जैसी महिलाओ की तरह दूसरो को क्या करना चाहिए क्या नही के परपंच में पड़ी रहती है पर अपने पति में कोई परिवर्तन नही कर पाती है न हीउन्हें इसका विरोध करना “ पतिव्रता ” स्त्री के लिए उचित लगता है !
- हमारे देश का दुर्भाग्य है की यहाँ सरकार बनाने मे बहुमत उन लोगो का है जिन्हे सरकार अथवा देश की किसी भी समस्या का कोई आभास तक नही है1यदि ऐसा कोई क़ानून बने की केवल ग्रॅजुयेट ही वोट देने मे सक्षम है तो मेरा दावा है की सरकार की श्कल ही कुछ और होगी और मेरा देश विश्व मे सर उठा कर अपना परपंच लहरा सकेगा1 जवाब दें
- लोक तंत्र का मंदिर भी लाचार बना कर डाल दिया कोई मछली बिकने का बाजार बना कर दाल दिया अब जनता को संसद भी परपंच दिखाई देती है नोटंकी करने का फिर मंच दिखाई देती है | कहाँ बनेगें मंदिर-मस्जिद कहाँ बनेगी रजधानी मण्डल और कमण्डल ने पी डाला आँखों का पानी प्यार सिखाने वाले बस्ते मजहब के स्कूल गये इस दुर्घटना में हम अपना देश बनाना भूल गये
- हमारे देश का दुर्भाग्य है की यहाँ सरकार बनाने मे बहुमत उन लोगो का है जिन्हे सरकार अथवा देश की किसी भी समस्या का कोई आभास तक नही है 1 यदि ऐसा कोई क़ानून बने की केवल ग्रॅजुयेट ही वोट देने मे सक्षम है तो मेरा दावा है की सरकार की श्कल ही कुछ और होगी और मेरा देश विश्व मे सर उठा कर अपना परपंच लहरा सकेगा 1