पार्वण श्राद्ध का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- अतः आज अपने माता-पिता एवं पितामह , प्रपितामह ( सपत्निकस्य ) साथ में द्वितीय कुल माताम ह , प्रमातामह , वृद्धप्रमातामह ( सपत्निकस्य ) को याद करते हुए अपराह्न काल में पार्वण श्राद्ध के अन्तर्गत जो करते बना शास्त्र सम्मत हमने पिष्डदानादि कार्य किया।
- पार्वण श्राद्ध में 9 ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है , किंतु शास्त्र किसी एक सात्विक एवं संध्यावंदन करने वाले ब्राह्मण को भोजन कराने की भी आज्ञा देते हैं। ..... इसके अलावा श्राद्ध में कैसे ब्राह्मणों को आमन्त्रित किस प्रकार किया जाये,कब आमन्त्रित किया जाये,निमत्रण के बाद .....
- प्रतिदिन किए जाने वाले श्राद्ध को ' नित्य श्राद्ध', एकोद्दिष्ट प्रभृति श्राद्ध को 'नैमित्तिक श्राद्ध', स्वाभिलाषित कार्यसिद्धि के लिए किए जाने वाले श्राद्ध को 'काम्य श्राद्ध', पुत्र जन्म, विवाह आदि में किए जाने वाले श्राद्ध को 'वृद्धि श्राद्ध' और अमावस्या तिथि में अथवा पर्व के समय में किए जाने वाले श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध कहते हैं।
- 21 . अर्ध्यप्रदान करने के बाद एकोदिष्ट श्राद्ध में पात्र को सीधा रखना चाहिए , जबकि पार्वण श्राद्ध में उलटा रखना चाहि ए. 22 . पति के रहते मृत नारी के श्राद्ध में ब्राह्मण के साथ सौभाग्यवती ब्राह्मणी को भी भोजन कराना चाहि ए. 23 . श्राद्ध के समय श्राद्ध कर्ता को पवित्री धारण अवश्य करनी चाहि ए.