प्रसन्नवदन का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- पर यह क्या गाड़ी का दरवाजा खोल कर जो सिर झुकाए व्यक्ति बाहर घर का ताला खोल रहा है उसके निर्बल व्यक्तित्व और पुराने प्रसन्नवदन , कामरुप के प्रतिरुप जतिन के व्यक्तित्व में कोई सामंजस्य न था ।
- मृगतृष्णा मृगतृष्णा की दुनिया मेरा साहित्य मेरा काव्य-पिटारा मेरा मन मेरा मन पंछी सा मेरी कलम मेरे जज़्बात मेरी कहानियां मेरी ग़ज़लें , मेरे गीत/ प्रसन्नवदन चतुर्वेदी मेरी डायरी मेरी निगाहों से....... मेरी भावनायें... मेरी रचनाऐ... मेरे अनुभव (
- अब मैनें अपने सभी निजी ब्लागों जैसे ‘ मेरी ग़ज़ल ' , ‘ मेरे गीत ' और ‘ रोमांटिक रचनाएं ' को एक ही ब्लाग ‘ ‘ मेरी ग़ज़लें , मेरे गीत / प्रसन्नवदन चतुर्वेदी '' में पिरो दिया है।
- क्त , दमनशील, जितेन्द्रिय, ऋजु, प्रसन्नवदन होकर माता, पिता, आचार्य, अतिथि, बन्धु, मित्र, राजा, प्रजा आदि के प्रियकारी हों, जब कभी किसी से बातचीत करें तब जो जो उसके मुख से अक्षर, पद, वाक्य निकलें उनको शांत होकर सुनके प्रत्युत्तर देवें ।
- तनिक स्मरण कीजिये कि मैंने विवाहपूर्व अतिसुन्दर , प्रसन्नवदन इंजीनियर लड़के के प्रणय-निवेदन को अस्वीकार करके आपका वरण किया था क्योंकि आप मेरी प्रिय सखी के अग्रज थे और मुझे विदित था कि आपको मेरी ही भाँति चलचित्र दर्शन में अनन्य रुचि है।
- तनिक स्मरण कीजिये कि मैंने विवाहपूर्व अतिसुन्दर , प्रसन्नवदन इंजीनियर लड़के के प्रणय-निवेदन को अस्वीकार करके आपका वरण किया था क्योंकि आप मेरी प्रिय सखी के अग्रज थे और मुझे विदित था कि आपको मेरी ही भाँति चलचित्र दर्शन में अनन्य रुचि है।
- मैने उसके घर पर दृष्टि डाली , सुरुचि पूर्ण ढंग से सजाया घर , फूलों से भरी बगिया और बड़ी सी बिन्दी लगाए , तनिक ढीले से जूड़े में गजरा लगाए प्रसन्नवदन सुषी , बिना कहे ही बहुत कुछ कह रहे थे ।
- अच्छी प्रस्तुति . ... बहुत बहुत बधा ई. .. मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘ मेरी ग़ज़ल ' , ‘ मेरे गीत ' और ‘ रोमांटिक रचनाएं ' को एक ही ब्लाग “ मेरी ग़ज़लें , मेरे गीत / प्रसन्नवदन चतुर्वेदी ” में पिरो दिया है।
- मुसाफिर हूँ यारों मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने मेरा काव्य-पिटारा मेरा मन मेरा मन मेरा मन पंछी सा मेरा संघर्ष मेरी कलम से . .... मेरी कल्पनायें... मेरी ग़ज़लें, मेरे गीत/ प्रसन्नवदन चतुर्वेदी मेरी छोटी सी दुनिया मेरी दुनिया मेरे सपने मेरी धरोहर मेरी भी मेरी माला,मेरे मोती...
- हे गर्दभबुद्धि नाथ ! तनिक स्मरण कीजिये कि मैंने विवाहपूर्व अतिसुन्दर , प्रसन्नवदन इंजीनियर लड़के के प्रणय-निवेदन को अस्वीकार करके आपका वरण किया था क्योंकि आप मेरी प्रिय सखी के अग्रज थे और मुझे विदित था कि आपको मेरी ही भाँति चलचित्र दर्शन में अनन्य रुचि है।