बृहती का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- वहां लिखा है , ‘‘ भूर्भुवः स्वः ‘‘ ( देवी बृहती छंद ) . तत्सवितु . ( निचृद् गायत्री छंद ) ‘‘ अर्थात यजुर्वेदीय छंद में देवीबृहती छंद और निचृद् गायत्री छंद का मिश्रण है।
- बृहती या निबन्धन- यह शबर भाष्य की व्याख्या है और वास्तविक अर्थ में इसे टीका कहा जा सकता है , क्योंकि इसमें सर्वत्र भाष्य की व्याख्या ही की गई है, कहीं भी उसकी आलोचना नहीं की गई है।
- विष्णु पुराण में उतथ्य - पत्नी ममता के गर्भ से अन्धे दीर्घतमा की उत्पत्ति के संदर्भ में ऐसा कहा जा सकता है कि जब तक उतथ्य बृहस्पति रूपी बृहती बुद्धि का आदर नहीं करेगा , तब तक वह अन्धा पुत्र ही उत्पन्न कर सकता है ।
- स्वामी दयानंद ने लिखा है , ‘‘ भूर्भुवः स्वः- इसमें ‘ देवी बृहती ‘ छंद है और ‘ तत्सवितु ‘ इत्यादि में ‘ निचृद् गायत्री ‘ . इस से जहां हमारी इस का नामकरण करने की मुश्किल हल हुई है , वहां हमें यह भी पता चलता है कि मंत्रकार में वह चाहे ईश्वर ( ? ) हो या वैदिक काल का कोई कवि इतना समर्थ नहीं था कि वह तीन पाद का एक शुद्ध छंद रच सके।
- इस बगलामुखी मन्त्र के नारद ऋषि है , बृहती छंद है , बगलामुखी देवता हैं , ह्लीं बीज है , स्वाहा शक्ति है और सभी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिये इस मन्त्र के जप का विधान है | इसका पुरश्चरण एक लाख जप है | चंपा के फूलों से दस हजार होम करना चाहिये , एक हजार बार तर्पण करना चाहिये सौ बार मार्जन करना चाहिये और दस ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये | इससे मन्त्र सिद्ध हो जाता है | जब मन्त्र सिद्ध हो जाये तब प्रयोग करना चाहिये |
- इस बगलामुखी मन्त्र के नारद ऋषि है , बृहती छंद है , बगलामुखी देवता हैं , ह्लीं बीज है , स्वाहा शक्ति है और सभी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिये इस मन्त्र के जप का विधान है | इसका पुरश्चरण एक लाख जप है | चंपा के फूलों से दस हजार होम करना चाहिये , एक हजार बार तर्पण करना चाहिये सौ बार मार्जन करना चाहिये और दस ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये | इससे मन्त्र सिद्ध हो जाता है | जब मन्त्र सिद्ध हो जाये तब प्रयोग करना चाहिये |