ब्रह्म वैवर्त पुराण का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- १ ० / ८ ६ / १ ५ ) ( वही ) ब्रह्म वैवर्त पुराण में मोहिनी नामक वेश्या का आख्यान है जो ब्रह्मा से संभोग की याचना करती है और ठुकराए जाने पर उन्हें धिक्कारते हुए कहती है , ‘‘ उत्तम पुरुष वह है जो बिना कहे ही , नारी की इच्छा जान , उसे खींचकर संभोग कर ले।
- १ ० / ८ ६ / १ ५ ) ( वही ) ब्रह्म वैवर्त पुराण में मोहिनी नामक वेश्या का आख्यान है जो ब्रह्मा से संभोग की याचना करती है और ठुकराए जाने पर उन्हें धिक्कारते हुए कहती है , ‘‘ उत्तम पुरुष वह है जो बिना कहे ही , नारी की इच्छा जान , उसे खींचकर संभोग कर ले।
- ref > [ [ भागवत पुराण ]] ( 56 - 57 ) , [[ वायु पुराण ]] ( 96 , 20 - 98 ) , [[ पद्म पुराण ]] ( 276 , 1 - 37 ) , [[ ब्रह्म वैवर्त पुराण ]] ( 122 ) , [[ ब्रह्माण्ड पुराण ]] ( 201 , 15 ) , [[ हरिवंश पुराण ]] ( 118 ) आदि।
- ब्रह्म वैवर्त पुराण में राजा कुशध्वज की पुत्री जिस तुलसी का शंखचूड़ से विवाह आदि का वर्णन है , तथा पृथ्वी लोक में हरिप्रिया वृन्दा या तुलसी जो वृक्ष रूप में देखी जाती हैं- ये सभी सर्वशक्तिमयी राधिका की कायव्यूहा स्वरूपा , सदा-सर्वदा वृन्दावन में निवास कर और सदैव वृन्दावन के निकुंजों में युगल की सेवा करने वाली वृन्दा देवी की अंश , प्रकाश या कला स्वरूपा हैं।