मंसूख का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- उदाहरण -जब किसी इस्लामी किताब में कोई खराब बात बताई जाती है , तो मुसलमान कसते है कि ,अनुवाद गलत है ,अमुक शब्द का अर्थ कुछ और है,हम इस फतवे या हदीस को नहीं मानते ,या यह आयत मंसूख (रद्द )हो चुकी है .आदि
- |उसने भारत की किसी भी रियासत को ब्रिटिश राज्य में विलय करने का एक भी अवसर जाने नही दिया |अपनी हडप - नीति के तहत उसने रियासतों में दत्तक पुत्र के अधिकार को मंसूख कर के उन्हें ब्रिटिश राज्य का हिस्सा बना लिया
- अब्दुल शकूर ने श्रीमती मूंगा देवी को ग्राम नींझडा की 2 . 014 हैक्टेयर भूमि का मुहायदा बय दिनांक 30-12-92 को किया था और इस रकम में से मूंगा देवी से ली गयी रकम अदा कर मुहायदा बय दिनांक 30-12-92 को दिनांक 15-3-95 को मंसूख करवा लिया।
- मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं मैं उन डिक्रियों को भी निरस्त कर दूंगा जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं मैं उन वसीयतों को खारिज कर दूंगा जो दुर्बलों ने भुजबलों के नाम की होंगी .
- उदाहरण -जब किसी इस्लामी किताब में कोई खराब बात बताई जाती है , तो मुसलमान कसते है कि , अनुवाद गलत है , अमुक शब्द का अर्थ कुछ और है , हम इस फतवे या हदीस को नहीं मानते , या यह आयत मंसूख ( रद्द ) हो चुकी है . आदि
- इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने फरमाया : यह आयत मंसूख ( जिसका हुक्म निरस्त कर दिया गया हो ) नहीं है , यह बूढ़े ( वयोवृद्ध ) पुरूष और बूढ़ी महिला के लिए है , वे दोनों रोज़ा रखने की ताक़त नहीं रखते हैं , अत : वे हर दिन के बदले एक मिस्कीन ( गरीब ) को खाना खिलायेंगे।
- दूसरे यह कि आयत में दो मर्दों या एक मर्द और दो औरतों की गवाही में इखतियार दिया गया है , और अगर अज़ रुए हदीस इन दो सिक़ों में एक शिक़ का और इज़ाफा हो जाए और वह यह कि एक गवाही और क़सम से भी फैसला हो सकता है तो इस से यह कहां लाज़िम आता है कि कुरआनी आयत का हुक्म मंसूख हो जाए।
- मैं कवि हूँ , कर्त्ता हूँ क्या जल्दी है मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित दोनों को एक साथ औरतों की अदालत में तलब करूँगा और बीच की सारी अदालतों को मंसूख कर दूँगा मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं मैं उन डिक्रियों को भी निरस्त कर दूंगा जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं
- मैं कवि हूँ , कर्त्ता हूँ क्या जल्दी है मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित दोनों को एक साथ औरतों की अदालत में तलब करूँगा और बीच की सारी अदालतों को मंसूख कर दूँगा मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं मैं उन डिक्रियों को भी निरस्त कर दूंगा जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं
- इस इकरारनामे के संबंध में पी0डब्लू0-1 अब्दुल अजीज का कथन है कि पचपन हजार रूपये नकद वादीगण ने अब्दुल शकूर को दिये थे और इकरारनामा निष्पादित किया था और इसी पचपन हजार रूपये में से अब्दुल शकूर ने चालीस हजार रूपये दिनांक 15-3-95 को श्रीमती मूंगा देवी को अदा कर अपनी जमीन छुडा ली थी और दिनांक 15-3-95 को मुहायदा बय दिनांक 30-12-92 अब्दुल शकूर ने मंसूख कराया था।