मण्डूक का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ४ तथा ४ ८ . ४ ० में उल्लेख आता है कि इषीका-अञ्जि अर्थात् इषीका-ज्योति या रेखा वाले मण्डूक को नीललोहित सूत्र से बांधकर शकुनि की भांति व्यवहार करे।
- अर्थ-कष्ट से पीड़ित होते हुए भी अनेक गुणों के आगार होने से वसिष्ठ ऋषि महान् माने गए ; पर मण्डूक ( मेढक ) धनिक होने पर भी गुणों के अभाव में क्षुद्र ही बने रहे।
- इस स्थिति में प्रारम्भ में सूर्य नमस्कार के एक या दो चक्र , वज्रासन , पवनमुक्तासन , मर्करासन , तितली आसन , गोमुख आसन , मण्डूक आसन आदि का ही अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करना चाहिए।
- इस स्थिति में प्रारम्भ में सूर्य नमस्कार के एक या दो चक्र , वज्रासन , पवनमुक्तासन , मर्करासन , तितली आसन , गोमुख आसन , मण्डूक आसन आदि का ही अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करना चाहिए।
- भूमिशय-बिलों में रहने वाले जन्तु-सर्प ( श्वेत-श्यामवर्ण का) चित्रपृष्ठ (जिसकी पृष्ठ चित्रित होती है), काकुली मृग-एक विशेष प्रकार का सर्प- मालुयासर्प, मण्डूक (मेंढक) गोह, सेह, गण्डक, कदली (व्याघ्र के आकार की बड़ी बिल्ली), नकुल (नेवला), श्वावित् (सेह का भेद), चूहा आदि।
- निश्चित रूप से वैज्ञानिक सोच और उसकी साहित्यक परिणति ही साहित्य की वह लोकमंगला धारा है जिससे मनुष्य विकासकामी और प्रगतिकामी बनता है अन्यथा अर्नगल , दिशाहीन और अस्पष्ट साहित्य यथार्थ से कोसों दूर मानव को कूप मण्डूक बनने में ही मदद करता है।
- मण्डूक उसे सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और उन सभी मण्डूकों ने , जो कि गोमायु ( गाय की तरह शब्द करने वाले ) , अजमायु ( अजा की तरह शब्द बोलने वाले ) , पृश्निवर्ण ( चितकबरे ) और हरित-वर्ण के थे , ऋषि को अपरिमित गायें दी।
- विदेशी भाषा के माध्यम द्वारा पढ़ने के लिए अपने युवकों को मजबूर करके हमने उनकी प्रतिभा को तो कुण्ठित कर ही दिया है , उनको रट्टू मण्डूक बना ही दिया है , साथ ही हमने अपने देश के साधारण जन में भी असहायता की , विचारशून्यता की प्रवृत्ति पैदा कर दी है और ज्ञान के स्रोत हर प्रकार से अवरुद्ध कर दिये हैं।
- इन सब चीजों का असर पाकिस्तान की तरक्की पर पड़ रहा है , मजहबी राष्ट्र होने से पूरा समाज कूप मण्डूक हो गया है , तानाशाही शासन व्यवस्था के कारण असंतोष और विद्रोह की कोई आवाज उठ ही नहीं पाती मजहब और तानाशाही की बेड़ियों से जब तक यह देश आजाद नहीं होगा तब तक इसके आगे बढ़ने के कोई आसार नहीं है।
- क्या करें , संस्कृति का सही अर्थ बच्चों को समझाने बैठें या उन्हें स्वयं ही समझने दें ? कपाट बन्द करने से उसके कूप मण्डूक हो जाने का भय है , कपाट खोल देने से वाह्य संस्कृतियों के दुर्गुण स्वीकारने का भय ? जब हमें चकाचौंध भाती है तो उन्हें भला क्यों न अच्छी लगेगी , क्या तब बच्चे लोभ संवरण कर पायेंगे ? बहुत से ऐसे ही प्रश्न उठ खड़े होते हैं जब बच्चों का परिचय हम अन्य संस्कृतियों से करवाते हैं।