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माध्व का अर्थ

माध्व अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. कल्याण को उन्होंने मात्र हिंदू धर्म की ही पत्रिका के रुप में पहचान देने की बजाय उसमे सभी धर्मों के आचार्यों , जैन मुनियों, रामानुज , निंबार्क , माध्व आदि संप्रदायों के विद्वानों के लेखों का प्रकाशन किया।
  2. कल्याण को उन्होंने मात्र हिंदू धर्म की ही पत्रिका के रुप में पहचान देने की बजाय उसमे सभी धर्मों के आचार्यों , जैन मुनियों, रामानुज , निंबार्क , माध्व आदि संप्रदायों के विद्वानों के लेखों का प्रकाशन किया।
  3. शोकसभा में उपाध्यक्ष किशोरीलाल , रवि यादव , नारायणदास , मूल चंदानी , माध्व माहौर , विपिन गर्ग , गौरवकांत शर्मा , अनिल कुमार , रूप किशोर यादव , मुकेश अग्रवाल , मोहित अग्रवाल , मौ .
  4. शोकसभा में उपाध्यक्ष किशोरीलाल , रवि यादव , नारायणदास , मूल चंदानी , माध्व माहौर , विपिन गर्ग , गौरवकांत शर्मा , अनिल कुमार , रूप किशोर यादव , मुकेश अग्रवाल , मोहित अग्रवाल , मौ .
  5. कल्याण को उन्होंने मात्र हिंदू धर्म की ही पत्रिका के रुप में पहचान देने की बजाय उसमे सभी धर्मों के आचार्यों , जैन मुनियों , रामानुज , निंबार्क , माध्व आदि संप्रदायों के विद्वानों के लेखों का प्रकाशन किया।
  6. कल्याण को उन्होंने मात्र हिंदू धर्म की ही पत्रिका के रुप में पहचान देने की बजाय उसमे सभी धर्मों के आचार्यों , जैन मुनियों , रामानुज , निंबार्क , माध्व आदि संप्रदायों के विद्वानों के लेखों का प्रकाशन किया।
  7. [ [ निम्बार्क संप्रदाय | निम्बार्क ]] , [[ माध्व सम्प्रदाय | माध्व ]] , [[ गौड़ीय सम्प्रदाय | गौड़ीय ]] , [[ रामानुज ]] , शंकर कार्ष्णि , उदासीन आदि समस्त धर्माचार्यो , में बलदेव जी की मान्यताएं हैं।
  8. [ [ निम्बार्क संप्रदाय | निम्बार्क ]] , [[ माध्व सम्प्रदाय | माध्व ]] , [[ गौड़ीय सम्प्रदाय | गौड़ीय ]] , [[ रामानुज ]] , शंकर कार्ष्णि , उदासीन आदि समस्त धर्माचार्यो , में बलदेव जी की मान्यताएं हैं।
  9. बैठक में जिला उपाध्यक्ष कन्हैयालाल गौतम , बालकृष्ण गौड़ , जिला सत्संग प्रमुख प्रमोद चतुर्वेदी , जिला संयोजक हिन्दू हैल्पलाइन माध्व गर्ग , जिला मीडिया प्रमुख अशोक राजपूत , जिला विद्यार्थी प्रमुख कुलदीप पाठक , नगर मंत्री गोकुलेश गौतम , सुमित , आशीष , महेश , बबलू चैधरी , नीशू चैहान हेमन्त चैधरी , प्रवीन , दिलीप समेत अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
  10. त्रिवंचुरें त्रिवृता रथेना यातम स्विना / माध्व : सोमस्य पीतये / अर्थात बलदायक प्राण और अपान तथा माधुर्य आदि गुण से संयुक्त -वीर्य शक्ति को विलीन करने के लिए तीन प्रकार के बन्धनों वाले - : वात , पित , तथा “ कफ ” इन तीनो प्रकृति वाले पदार्थो से बंधे हुए तीन गुण , सत्व , रज और तमाल - इस शारीर को प्राप्त हो /
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