मूठी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- रिलायन्स पावर अच्छा इसू आया है उसमे मूज़े 15 शेर लगे है ओर अनिलभाई 5 : 1 बोनुस देने का सूज़ाव योग्य है करलो दुनिया मूठी मे ओर पावर को ये दाम से भी लेलो लंबी मुसाफ़िर के लिए काम आएगा गाँधी समीर, राजू. आभार
- “ मूठी उंचेरा मानवी ” के नाम से जिनको आम जनता पहेचानती थी ऐसे पूज्य रवीशंकरदादा की खुदको घीसकर उज्वल बनो जैसी सोनेरी सलाह , अगर मा अपने बच्चेको बचपन से सीखाती हो तो जवान होने के बाद उस बालक का जीवन उज्वल होगा ही ।
- “ मूठी उंचेरा मानवी ” के नाम से जिनको आम जनता पहेचानती थी ऐसे पूज्य रवीशंकरदादा की खुदको घीसकर उज्वल बनो जैसी सोनेरी सलाह , अगर मा अपने बच्चेको बचपन से सीखाती हो तो जवान होने के बाद उस बालक का जीवन उज्वल होगा ही ।
- जब तक हमको पेट भर खाने के लिए नहीं मिलता , हम दो मूठी अन्न के लिए तरसते रहते हैं , उन दिनों हमको यही सोच रहता है , कैसे पेट भर खाने को मिलेगा , कहाँ से दो मूठी अन्न लायें , जिससे पापी पेट की आग बुझे।
- जब तक हमको पेट भर खाने के लिए नहीं मिलता , हम दो मूठी अन्न के लिए तरसते रहते हैं , उन दिनों हमको यही सोच रहता है , कैसे पेट भर खाने को मिलेगा , कहाँ से दो मूठी अन्न लायें , जिससे पापी पेट की आग बुझे।
- और वह भरती गयी भीतर से , प्रेम से ! उसने पाया प्रेम कहीं बाहर नहीं ,है उसमे ही है , चीखना , झूटी मूठी शिकायत जैसी शरारतें करना छोड़ा नहीं है अभी उसने , मगर जानती है , प्रेम कही और नहीं है , स्वयं उसके भीतर है !
- अब पानी सर से ऊपर गुजर रहा था , सो चाचाजी को छोड़कर सारे लोगों ने प्लानिंग बनाई की किसी तरह से टीवी को खराब कर दिया जाय, टीवी वाले अंकल को सैट किया गया, उन्होने झूठी मूठी बताया कि एक स्पेयर पार्ट खराब हो गया है, आने मे एक महीना लगेगा……
- और वह भरती गयी भीतर से , प्रेम से ! उसने पाया प्रेम कहीं बाहर नहीं , है उसमे ही है , चीखना , झूटी मूठी शिकायत जैसी शरारतें करना छोड़ा नहीं है अभी उसने , मगर जानती है , प्रेम कही और नहीं है , स्वयं उसके भीतर है !
- वहाँ अलका में कामी प्रियतम अपने चंचल हाथों से लाल अधरोंवाली स्त्रियों के नीवी बन्धनों के तड़क जाने से ढीले पड़े हुए दुकूलों को जब खींचने लगते हैं , तो लज्जा में बूड़ी हुई वे बेचारी किरणें छिटकाते हुए रत्नीदीपों को सामने रखे होने पर भी कुंकुम की मूठी से बुझाने में सफल नहीं होतीं।
- यूपी वाले की तरक्की देख कर कूच्छ मूठी भर मराठी लोग जलते हैं जिन ग़रीब लोग पर अत्याचार कर रँहे है उनसे ही मुंबई चल रही हैं जलन रखना बेवकूफ़ी है राज ताकरे यह सब जलन वश वोट बनाने की मक़सद से कर रहे है ऐसे लोगो के लिए कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए