यजु का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- यजुर्वेद की उपयोगिता एक नजर में- यजु का अर्थ होता है यज्ञ।
- इदमहमनृतात्सत्यमुपैमि ॥ १ ॥ यजु . अ. १ , मं . ५ ॥
- बिन्दु का केन्द्र ऋक है , परिघि साम है, बीच का क्षेत्र यजु है।
- 40 अध्यायों में पद्यात्मक मंत्र और गद्यात्मक यजु : भाग का संग्रह है।
- ३ ६ ) , और शेष को यजु ; कहा जाता हैं .
- ऋ $ क् यानि अग्नि , यजु अर्थात वायु , साम यानि आदित्य।
- ऋ $ क् यानि अग्नि , यजु अर्थात वायु , साम यानि आदित्य।
- हर शरीर एक पुर है , इसमें गतिमान यजु : प्राणों का लोक है।
- पूखा नो यथा वेदसामसद्वृद्धे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये॥ ( यजु . 25 / 18 )
- मूल संहिताएं ऋक , यजु , साम एवं अथर्व , केवल चार ही हैं।