लापसी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- ढेर सारी गुड़ की लापसी या चावल और चने की दाल बनती थी और हम सब लोग मिलकर गुड़ की उस लापसी या चावल और दाल के स्वाद का आनंद उठाया करते थे .
- ढेर सारी गुड़ की लापसी या चावल और चने की दाल बनती थी और हम सब लोग मिलकर गुड़ की उस लापसी या चावल और दाल के स्वाद का आनंद उठाया करते थे .
- जब आचार्या का खाना बनकर तैयार था तो उसी समय व्यास जाति के लोगों ने बनाया हुआ खाना खराब कर दिया और वहाँ पर नुकसान किया इस पर हर्ष जाति के लोगों ने लापसी बनाकर समाज को भोजन करवाया ।
- विशेष- : शायद आपको यह जानकर अच्छा लगेगा की कुछ स्वादिष्ट मिष्ठान जो घर पर त्योहारो मे अमुमन देश के सभी राज्यो मे बानाऐ जाते है- जो पोष्टिक,स्वादिष्ट, के साथ-साथ शुद्ध भी होते है- इसमे गाजर का हलवा, मीठे चावल, लापसी, सेमिया पायसम, इत्यादी।
- ' कैमर पूजै सैंगरखांइ ' कहावत के आशय से यह भी सिद्ध होता है कि त्रेता द्वापर युगों के समय में ये सैंगर ( शमीवृक्ष ) की फली , सैंगरफरी को सुखाकर उनका आहार में पुरोडाश ( हलुआ लापसी ) बनाकर प्रयोग करते थे ।
- जीवन को धूप-छांव का सहकार कहो या दाना चुगती चिड़ियों के साथ नादां का व्यवहार पागल के हाथ पड़ी माचिस-सी होती है जिंदगी दीवाली की लापसी , ईद की सिवइयां क्रिसमस ट्री पर सजे चॉकलेट्स से बहुत मीठी होती है जिंदगी जिसे जीना पड़ता है
- शायद आपको यह जानकर अच्छा लगेगा की कुछ स्वादिष्ट मिष्ठान जो घर पर त्योहारो मे अमुमन देश के सभी राज्यो मे बानाऐ जाते है- जो पोष्टिक , स्वादिष्ट, के साथ-साथ शुद्ध भी होते है- इसमे गाजर का हलवा, मीठे चावल, लापसी, सेमिया पायसम, इत्यादी।सहायक संपादक हीरामन मनोरंजक टिपणियां के साथ. “मैं हूं हीरामन” अरे हीरु…बोल पीरु..
- श्रीराम कृष्ण गोपाल प्राणी सेवा समिति ( (गोशाला)) की ओर से गोपाष्टमी पर्व पर गोवाटिका में गाय पूजन, लापसी वितरण, भगवान कृष्ण मंदिर में महाआरती, पूजा-अर्चना, ध्वजा चढ़ाने, भजन कीर्तन समेत विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए, जिसमें संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों व श्रद्धालुओं ने गो माता व भगवान वासुदेव के जयकारे लगाए एवं लापसी खिलाकर गाय-बछड़े का विधिवत पूजन किया।
- श्रीराम कृष्ण गोपाल प्राणी सेवा समिति ( (गोशाला)) की ओर से गोपाष्टमी पर्व पर गोवाटिका में गाय पूजन, लापसी वितरण, भगवान कृष्ण मंदिर में महाआरती, पूजा-अर्चना, ध्वजा चढ़ाने, भजन कीर्तन समेत विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए, जिसमें संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों व श्रद्धालुओं ने गो माता व भगवान वासुदेव के जयकारे लगाए एवं लापसी खिलाकर गाय-बछड़े का विधिवत पूजन किया।
- गणगौर की बिदाई परसों है अभी से बिदाई के क्षणों की कल्पना कर सभी लोग भावनाओ में बह रहे है किन्तु अगले साल फिर नई उमंगो के साथ गणगौर को घर लाने की आकांक्षा में गणगौर की विदाई की तैयारी शुरू हो गई है लापसी , दही भात , मीठा इमली का पानी , पूड़ी , मेथी दाने का साग , और पूरण पोली , पीली चुनरी , साफा सब कुछ है तैयार |