वह्रि का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- शुद्धसाध्य व्यापक उपाधि - जब वह्रि से धूम का अनुमान किया जाता है , तब “आद्र्र र्इंधन” उ गीली लकड़ी शुद्ध साध्य का व्यापक उपाधि होता है, क्योंकि आद्र्रं र्इंधन धूम रूप साध्य के सभी आश्रयों में रहता है पर अग्नितप्त लोहगोलक में न रहने के कारण वह्रि रूप साधन के सब आश्रयों में नहीं रहता।
- रघुनाथ का तात्पर्य यह है कि जिस साध्य का विपक्ष नहीं होता उस साध्य का अनुमान “केवलान्वयी” अनुमान कहा जाता है , जैसे वाच्यत्व, ज्ञेयत्व आदि सार्वत्रिक धर्मों का अनुमान; एवं जिस साध्य का सपक्ष नहीं होता उस साध्य का अनुमान “केवल व्यतिरेकी” अनुमान कहा जाता है, जैसे गंध से पृथिवी में पृथिवीतरभेद का अनुमान; तथा जिस साध्य में सपक्ष, विपक्ष दोनों होते हैं उस साध्य का अनुमान “अन्वयव्यतिरेकी” अनुमान कहा जाता है, जैस घूम से वह्रि का अनुमान।
- रघुनाथ का तात्पर्य यह है कि जिस साध्य का विपक्ष नहीं होता उस साध्य का अनुमान “केवलान्वयी” अनुमान कहा जाता है , जैसे वाच्यत्व, ज्ञेयत्व आदि सार्वत्रिक धर्मों का अनुमान; एवं जिस साध्य का सपक्ष नहीं होता उस साध्य का अनुमान “केवल व्यतिरेकी” अनुमान कहा जाता है, जैसे गंध से पृथिवी में पृथिवीतरभेद का अनुमान; तथा जिस साध्य में सपक्ष, विपक्ष दोनों होते हैं उस साध्य का अनुमान “अन्वयव्यतिरेकी” अनुमान कहा जाता है, जैस घूम से वह्रि का अनुमान।