वामपन्थ का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- साम्राज्यवादी कम्पनियों के फाउण्डेशनों से लाखों डॉलर उठाने वाले और पूँजीवाद के टुकड़खोर केजरीवाल साहब ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कोई उनकी नज़दीकी वामपन्थ से भी बिठा सकता है !
- यह वामपन्थ तभी से निर्मित होना शुरू हुआ जब से वे सक्रिय हुए , उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकारों के साथ जुड़ा व्यक्ति , खदानों की खुदाई का विरोध करने वाला व्यक्ति क्या वामपन्थी नहीं है।
- संसदीय वामपन्थ और अर्थवाद की राजनीति चूँकि मार्क् सवाद के सारतत्त्व ( वर्ग-संघर्ष और सर्वहारा अधिनायकत्व ) में ‘ संशोधन ' ( यानी वास्तव में तोड़-मरोड़ ) करने की कोशिश करती है , अतः उसे संशोधनवाद भी कहा जाता है।
- इसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया एक ओर कई राज्यों में ग़ैरकांग्रेसी सरकारों के गठन और छात्र-युवा आन्दोलनों के रूप में तो दूसरी ओर नक्सलबाड़ी किसान उभार और संसदीय वामपन्थ से निर्णायक विच्छेद करने वाले क्रान्तिकारी वामपन्थी एकजुटता की प्रक्रिया के रूप में सामने आयी।
- आम जनता में वामपन्थ के प्रति नकारात्मक रवैये का कारण सीपीआई , सीपीएम-मार्का संशोधनवादी पार्टियों की जनहितों और मार्क्सवाद से ग़द्दारी को माना जा सकता है , लेकिन चेतन भगत जैसे स्वनामधन्य अर्थशास्त्री के राजनीतिक दिवालियेपन का ज़िम्मेदार इन कारणों को नहीं ठहराया जा सकता।
- पश्चिम बंगाल में संसदीय वामपन्थ की पराजय का कारण ये पार्टी-सिद्धान्त में और लेनिन और स्तालिन द्वारा मार्क् सवाद में पैदा की गयी स्विकृति ” को मानते हैं , जिसका अर्थ है हिरावल पार्टी का लेनिनवादी सिद्धान्त , जो अनिवार्य रूप से तथाकथित स्तालिनवादी अतियों में परिणामित होता है।
- पश्चिम बंगाल में बीते विधानसभा में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क् सवादी ) -नीत वाम मोर्चे की करारी हार के बाद जो दृश्य उपस्थित हुआ वह संशोधनवादी वामपन्थ “ यानी , नाम में मार्क् सवादी , काम में पूँजीवादी ” के पतन पर हमेशा ही उपस्थित होता है।
- कुएँ के मेंढक की तरह इन्हें कुएँ जितना ही आसमान दिखाई देता है , इसलिए वामपन्थ के विकास-विरोधी होने के बारे में ये अपनी ऐसी सोच रख रहे हैं , वरना 1917 - 56 तक के सोवियत रूस और 1949 - 76 तक के समाजवादी चीन के बारे में कौन नहीं जानता।
- इसके अतिरिक्त , इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं व नायकों की वर्षगाँठों के माध् यम से , कुछ स्वतन्त्र वैचारिक टिप्पणियों के माध् यम से तथा बहुत सीमित हद तक सीधे विचारधारा पर केन्द्रित लेखों के माध् यम से राजनीतिक शिक्षा दी जाती है और क्रान्तिकारी वामपन्थ की वर्तमान समस्याओं और कार्यभारों के बारे में बताया जाता है।
- पहली तो यह कि आज वामपन्थ को और ( कथित या वास्तविक ) वामपन्थी रचनाकारों को चाहे जितना बुरा-भला कहा जाये यह स्थिति तो बन ही गयी है कि वामपन्थी होना एक सकारात्मक मूल्य बन चुका है , वरना अज्ञेय को , जो सारी उमर मार्क्सवाद का विरोध करते रहे , वामपन्थी घोषित करने की ऐसी ज़रूरत उदय प्रकाश को महसूस न होती।