विराट पुरुष का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- विराट पुरुष की इस परिकल्पना में दुनिया के सभी धर्म अद्भुत रूप से समान नज़र आते हैं .
- यहाँ पर यह भी कहना पङता है कि उसका ध्यान विराट पुरुष को ध्येय बनाकर करना होगा .
- यहाँ उसी की महिमा का वर्णन किया गया है , परन्तु वह विराट पुरुष उससे भी बड़ा है।
- उस विराट पुरुष ने कहा- ' यदि मुझसे ज्येष्ठ कोई नहीं हो तो मैं सृष्टि का निर्माण करूंगा।
- ये भी बतायें कि विराट पुरुष की चोटी यानि सिर के पार यानि ऊपर सतलोक आदि हैं ।
- जो मनुष्य इस विराट पुरुष की इस प्रकार से आराधना करता है , वह सबसे उच्च स्थिति में पहुंचता है।'
- विराट पुरुष के एक एक रोम ( शरीर पर उगने वाले वाल ) में कई कई सृष्टियाँ हैं ।
- शास्त्रों और अन्य वाणियों में विराट पुरुष के रोम रोम में खण्ड बृह्माण्ड की बात कही गयी है ।
- आए विराट पुरुष की समझ , ग्यान फिर हो जाता है, न ऊंचा-नीचा न कोय, बड़ा-छोटा फिर कुछ नहीं होता।
- वेद वांग्मय में पुरे ब्रह्माण्ड में व्याप्त आत्म तत्व की कल्पना आदि पुरुष यानी विराट पुरुष के रूप में हुई .