शफा का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- या है ईसा का कोई रहबर बांटता जो ज़कात राहों में - दर्द-मंदों को बक्श दे जो शफा इश्क ने नाम दिया जिसको वफ़ा ? ” इसी के आस-पास मेरा वजूद वही ग़रीब-नवाज़ मेरा रसूल | मैं फ़कत खाक-ए-इश्क का कतरा मैं उसी आब-ओ-हवा का दाना..
- ************************************* जादूगर ज़ो छू मंतर बोलेगा दिखते को ग़ायब कर देगा नफ़रत करे फ़ना तो शफा मानू . ....... ************************************** मा के पल्लू में छुपा करती थी जो कल् तक आज शर्मा के अपने आँचल में सिमटी बैठी है पराया धन है ज़ो ले जाएँगे डोली में कहार.......
- 11 वीं शताब्दी में जन्में इस्लाम महजब के विद्वान तथा बगदाद इस्लामिया संस्थान के तत्कलीन प्रमुख अल गजाली द्वारा लिखित अरबी ग्रन्थ ‘ इह्म उलूम अल दीन ' जिसका उर्दू अनुवाद मजाकुल आरफिन में कहा गया है कि गाय का गोश्त मर्ज हैं , उसका दूध शफा और घी दवा है।
- उन्हें इस नायाब गज़ल के लिये बधाई शफा जी ने तो दिल ही लूट लिया है मतला क्या पूरी गज़ल ही दाद मांम्गती है वो नन्हें लवों पर - वो किलकारियां ले गया- जो अंगियार हैं- सभी शेर गज़ब के हैं शफा जी को बधाई आपका धन्यवाद और आशीर्वाद सब को बसंत पंचमी की शुभकामनायें
- उन्हें इस नायाब गज़ल के लिये बधाई शफा जी ने तो दिल ही लूट लिया है मतला क्या पूरी गज़ल ही दाद मांम्गती है वो नन्हें लवों पर - वो किलकारियां ले गया- जो अंगियार हैं- सभी शेर गज़ब के हैं शफा जी को बधाई आपका धन्यवाद और आशीर्वाद सब को बसंत पंचमी की शुभकामनायें
- यही कि … “ अरे ! … अपने इस हुनर … अपनी इस काबिलियत के बल पे तुम नाचीज़ रहे कहाँ ? … तुम्हारे हाथ में … तुम्हारी नाक में … तुम्हारे मुंह में तो ऐसी शफा है कि तुम पलक झपकते ही हमारी बिगड़ी हुई किस्मत को एक झटके में ही संवार सकते हो ” …
- इससे पहले कि मौत हमें रुसवा करदे , तूं हमारे जिस्म हमारी रुह को नेक करदे , ये जो हालात हैं हमारे हमने ही बनाए हैं , जैसा तूं चाहता है अब वैसा करदे , हमारे हर फैसले में तेरी रजा शामिल हो , जो तेरा हुक्म हो वो हमारा इरादा करदे , हम में जो बीमार हैं उनको तूं शफा दे , जो ये दुआ भेजे उसकी तमन्ना पूरी करदे।
- ज़िन्दगी का जोगराफिया ही बदल डालते हैं , सब तेहस नहस कर जाते हैं.... आप जो हैं, जो होंगे ...आपके अस्तित्व को....आपके ज़मीर को टटोल जाते हैं जन्दगी में कभी मद्धम हवा, कभी तूफ़ान और कभी रुकी सी हवा आ जाती हैं ज़िन्दगी ऐसे ही तूफानों से गुज़र के शफा हो जाती हैं कोई आपकी ज़िन्दगी में तूफ़ान लाता हैं या वो माधाम हवा बन जाता हैं क्या आआप भी किसी की ज़िन्दगी में तूफ़ान लाये हैं ?
- टूटे हुए उसूल थे , जिनका रहा गुमाँ ॥ दीवार दर को ना सही अहसास कोई पर दिल नाम का जो घर मेरा यादें बसी वहाँ॥ नश्तर चुभोके शब्द के , गहरे किये है जख्म जो दे शफा सुकून भी , मरहम वो है कहाँ ? झोंके से आके झाँकती है ये खुशी कभी बसती नहीं है जाने क्यों बनके वो मेहरबाँ॥ खामोश तो जुबान पर आँखें न चुप रही नादान ऐसा भी कोई समझे न वो जुबाँ॥ इन गर्दिशों के दौर से देवी न बच सकें जब तक जमीन पर है हम , ऊपर है आसमाँ॥ देवी