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शब्दरूप का अर्थ

शब्दरूप अंग्रेज़ी में मतलब

उदाहरण वाक्य

  1. ऊं-ऊं ' ऐसा स्पष्ट शब्दरूप नाद सुनाई पड़ा , उसी एकाक्षर प्रणव ‘ ऊँ ' से अकार संज्ञक-भगवान ब्रह्मा , उकार संज्ञक परम कारण स्वरूप-विष्णु तथा मकार संज्ञक परमेश्वर नीलोहित का पुनः प्रादुर्भाव हुआ।
  2. अभयजी , आपने एकदम सही कहा, वेदना भी विद् से ही निकली है जो प्रत्यक्ष ज्ञान जैसे अर्थों के साथ-साथ भावना,पीड़ा जैसे अर्थों में भी उजागर होती है और संवेदना जैसे शब्दरूप भी इससे ही निकले हैं।
  3. इनके माध्यम से सैक्सन , इंग्लिश, 'आयरिश' 'प्राचिन जर्मन' ( गाथिक ) आदि भाषाओं के ऐसे प्राचीन शब्दरूप बहुत बडी़ मात्रा में सुरक्षित रह गए हैं जिनमें उन-उन भाषाओं के बहुत से शब्द आज अन्यत्र दुर्लभ है ।
  4. परमप्रभु की विशेष कृपा रही तो अब वह दिन दूर नहीं की सदानन्द परमतत्त्वम् रूप आत्मतत्त्वम् -काल अलम्-गॉड शब्दरूप खुदा-गॉड-भगवान् रूप अकाल पुरुष रूप परम पुरुष वाला ही सबको ( जिज्ञासु भक्तों को ) दिखाई देने लगेगा ।
  5. जिन घटनाओं के आधार पर प्राचीन बारतीय संस्कृति के दस्तावेज़ों को मिथक कह कर कपोल-कल्पित मानते हैं , उनके तथा विभिन्न रामायणों में प्रस्तुत विकृत तथ्यों के निराकरण हेतु आपका वैज्ञानिक आधार पर किया गया शब्दरूप शोध तर्कसंगत है।
  6. अभयजी , आपने एकदम सही कहा , वेदना भी विद् से ही निकली है जो प्रत्यक्ष ज्ञान जैसे अर्थों के साथ-साथ भावना , पीड़ा जैसे अर्थों में भी उजागर होती है और संवेदना जैसे शब्दरूप भी इससे ही निकले हैं।
  7. अहंकार जो है वह-जिस प्रकार ब्रम्हाण्ड में सर्वेसर्वा ' परमतत्त्वम् रूप आत्मतत्त्वम् शब्दरूप शब्द ब्रम्ह या परमब्रम्ह या परमेश्वर रूप ' परम ' ही अधिकार चलाता है , ठीक उसी प्रकार पिण्ड में यह ' अहं ' शब्द रूप ' अहंकार ' अधिाकार चलाता है।
  8. सॉफ्टवेयर के आकृति विज्ञान कार्य उपयोगकर्ता के इनपुट से शब्द के लैमा या मूल रूप की उत्पत्ति का पता करने के लिए डेटाबेस के साथ वितरित किए जाते हैं , केवल मूल रूप डेटाबेस में संग्रहीत है जब तक कि इसमें अनियमित बदले हुए शब्दरूप न हो।
  9. तुम अगिन् में दाहिका शक्ति , जल में शीतलता, सूर्य में सदा तेज:स्वरूप तथा कान्तिरूप, पृथ्वी में गन्धरूप, आकाश में शब्दरूप, चन्द्रमा और कमलसमूह में सदा शोभारूप, सृष्टि में सृष्टिस्वरूप, पालन-कार्य में भलीभाँति पालन करने वाली, संहारकाल में महामारी और जल में जलरूप में वर्तमान रहती हो।
  10. तुम अगिन् में दाहिका शक्ति , जल में शीतलता, सूर्य में सदा तेज:स्वरूप तथा कान्तिरूप, पृथ्वी में गन्धरूप, आकाश में शब्दरूप, चन्द्रमा और कमलसमूह में सदा शोभारूप, सृष्टि में सृष्टिस्वरूप, पालन-कार्य में भलीभाँति पालन करने वाली, संहारकाल में महामारी और जल में जलरूप में वर्तमान रहती हो।
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