शीआ का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- याद रहे पाकिस्तान के रावलपिंडी नगर में दसवीं मुहर्रम को उस समय दो गुटों में झड़प हुई जब इमाम हुसैन का मातम करने वालों के जूलूस के गुज़रने के समय एक वक्ता ने विवादस्पद भाषण दिया और वहां उपस्थिति कुछ लोगों ने शीआ समुदाय के लिए अपमानजनक नारे लगाए।
- [ फतह-अल-बारी , 16 : 341 तथा सवाइक़ अल-मुहरिका , खंड 19 ] सुन्नी शीआ दोनों ही समुदाय के कुछ आचार्य नबीश्री के निधनोपरांत इस्लाम के बारह पथ-प्रदर्शकों , अमीरों या खलीफाओं के सन्दर्भ इंजील [ बाइबिल ] और तौरात [ ओल्ड टेस्टामेंट ] में भी देखने के पक्षधर हैं .
- शीआ आस्था के मुसलमान नबीश्री के उन तथाकथित मित्रों को प्रिय नहीं रखते जो धर्म युद्धों में जब भी रणक्षेत्र में भेजे जाते तो न हताहत होते न ही विजयी . अपने प्राण बचाकर रणक्षेत्र से लौट आते . फिर भी बढ़-चढ़ कर बातें करने में कोई कमीं न आती .
- वरिष्ठ नेता इस परिवर्तन के संदर्भ में कहते हैं कि आज इस्लामी जगत में इस्लामी आंदोलन में शीआ व सुन्नी का कोई अंतर नहीं है , शाफ़ई , हनफ़ी , जाफ़री , मालेकी , हंबली और जै़दी में कोई अंतर नहीं है अरबों और फार्सों तथा अन्य जातियों में कोई अंतर नहीं है।
- यद्यपि शीआ धर्माचार्य इन पुस्तकों की बहुत सी हदीसें गैर प्रामाणिक मानते हैं फिर भी वे हदीसें जो श्रीप्रद कुरआन के किसी आदेश से नहीं टकरातीं और जिनमें नबीश्री की सुयोग्य सात्विक संतानों की प्रशस्ति और प्रशंसा है , उन्हें न केवल स्वीकार करते हैं अपितु बेझिझक उनके सन्दर्भ भी देते हैं .
- एक बात पर सुन्नी शीआ दोनों ही धर्माचार्य एकमत हैं कि इन अमीरों या खलीफाओं में से अन्तिम अमीर या खलीफा नबीश्री की बेटी हज़रत फातिमा की संतान में से हज़रत इमाम मेहदी ( र. ) होंगे . प्रख्यात सुन्नी धर्माचार्य अल-जुवायनी ने हदीसों के संग्रह फ़राइज़-अल-सिमतैन ( पृ 0 160 ) में इस प्रसंग में कुछ और महत्वपूर्ण सन्दर्भ जोड़े हैं .
- बहरैन में शीआ मुसलमान , बहुसंख्या में हैं किंतु २ ०० वर्षों से भी अधिक समय से यह देश एक सुन्नी मुसलमान परिवार के हाथ में है जो बहुसंख्यक शीआ मुसलमानों के साथ भेदभाव करती है और इसी लिए सन दो हज़ार ग्यारह से इस देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहे हैं जिन्हें राजशाही सरकार , पश्चिमी सरकारों के समर्थन के कारण , कड़ाई से कुचल रही है।
- बहरैन में शीआ मुसलमान , बहुसंख्या में हैं किंतु २ ०० वर्षों से भी अधिक समय से यह देश एक सुन्नी मुसलमान परिवार के हाथ में है जो बहुसंख्यक शीआ मुसलमानों के साथ भेदभाव करती है और इसी लिए सन दो हज़ार ग्यारह से इस देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहे हैं जिन्हें राजशाही सरकार , पश्चिमी सरकारों के समर्थन के कारण , कड़ाई से कुचल रही है।
- , हज़रत उमर ( र. ) और हज़रत उस्मान ( र. ) ही को नहीं बाद के उमैया खलीफाओं को भी इसका अधिकारी मानने के पक्ष में हैं , वहीं शीआ सम्प्रदाय के धर्माचार्य नबीश्री के बाद चारित्रिक गुणों और नबीश्री से नैकट्य के आधार पर हज़रत अली ( र , ) तथा नबीश्री की बेटी फ़ातिमा की सुयोग्य संतानों को ही , जिन्हें वे इमाम मानते हैं , इस पद का अधिकारी समझते हैं .
- इस आधार पर इस्लमी मतों के मध्य समरसता व एकजुटता के लिए वातावरण बनाने के लिए शीआ व सुन्नी मुसलमानों को एक दूसरे को अच्छी तरह से पहचानना होगा ताकि वैचारिक मतभेदों के बावजूद एक दूसरे के प्रति सहनशीलता में वृद्धि हो और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बाहरी तत्वों की ओर से जारी , भड़काऊ कार्यवाहियों से दूर रहते हुए एकता को एक मूल आवश्यता के रूप में महत्व दिया जाना संभव हो सके।