संचित कर्म का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- इसीलिये ज्ञान का महत्व है कि ज्ञान हो जाने पर समस्त संचित कर्म नष्ट हो जाते हैं।
- इन स्फुरणा से आगे नये क्रियमाण कर्म बनते हैं जिसमें कुछ संचित कर्म से जुड़ जाते हैं।
- व्यक्ति के अपने पाप ग्रहों का पूर्व संचित कर्म है , जो बंधन से मुक्त नहीं होने देता।
- हरी सिमरन से करोड़ों जन्मो के संचित कर्म शनैः शनैः स्वत ही क्षय होने लग जाते हैं ।
- संचित कर्म का कितना अंश एक जन्म में भोगना है इसका निर्णय कर्म के अधिकारी देवता करते हैं।
- यह संचित कर्म ही हमारा प्रारब्ध भी होते हैं और इसी से आगे की दिशा भी तय होती है।
- इसलिए मनुष्य को अपने पूर्व संचित कर्म भोग के अलावा और सुख और दुःख उसके खुद के निर्मित हैं।
- जो अपनी संचित कर्म राशि को ज्ञानाग्नि से भस्म कर देता है उसी को बुधजन ' पंडित' कहते हैं -
- जो अपनी संचित कर्म राशि को ज्ञानाग्नि से भस्म कर देता है उसी को बुधजन ' पंडित' कहते हैं -
- हर प्राणी के मानसपटल व अन्तःकरण में उसके संचित कर्म ; मनसा , वाचा व कर्मणाद्ध अंकित होते है।