सुकेशी का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- कदाचन एकदा दण्डक-अरण्य में अरुण मदिरेक्षणा तरुणी सुकेशी करभोरू कामरूपिणी शूर्पणखा मोहित हुई थी चन्द्रकान्त सी चन्द्रनिभ अति अभिराम रामचन्द्र पै , या कि जैसे फूल पर लुब्ध होती तितली मुग्ध होती अर्क-प्रभा या कि जैसे मेरु पै।
- बस में सवार घायल रोहित पाईक पिता लक्षेन्दर व उसकी पत्नी सुकेशी ने बताया कि बस बहुत रफ्तार से रायपुर की ओर जा रही थी तभी अचानक बावनकेरा थाना पटेवा के पास अनियंत्रित होकर पेड़ में जा घुसी .
- सफेद शेर की नस्ल बचाने के लिए रीवा महाराज गुलाब सिंह और मार्तण्ड सिंह ने सुकेशी को मोहन से अलग कर दिया तथा मोहन और सुकेशी से उत्पन्न एक शेरनी से पैदा शेरनी राधा को मोहन के पास छोड़ दिया।
- सफेद शेर की नस्ल बचाने के लिए रीवा महाराज गुलाब सिंह और मार्तण्ड सिंह ने सुकेशी को मोहन से अलग कर दिया तथा मोहन और सुकेशी से उत्पन्न एक शेरनी से पैदा शेरनी राधा को मोहन के पास छोड़ दिया।
- सुकेशी - आप निश्चिंत रहें , मैं याद करा दूंगी ; क्या भोजन करना होगा , कैसे रहना होगा कैसे स्नान करना होगा , यह सब लिखा दूंगी और अम्मा जी , आज से अठारह मास बाद आपसे कोई भारी इनाम लूंगी।
- सुकेशी को जहाँ दफ़नाया गया था , वहां एक अंकुर फूटा और धीरे धीरे वह एक सुन्दर पेड में बदल गया.एक नौजवान केवट को वह पेड इतना पसंद आया कि उसने उस पेड की दाल से एक नाव बनाई.वह नाव इतनी सुन्दर बनी कि न चाहते हुए भी लोगों का दिल उसमें बैठाने को करता.युवक का धंधा चल निकला।
- विधाता का खेल कि कुछ ही दिन बाद उसकी पत्नी काल का शिकार हो गई . लोगों ने समझा-बुझा कर साहूकार का दूसरा ब्याह करवा दिया.सौतेली माता को सुकेशी फूटी आंखों न सुहाती.उसने सुकेशी के सुन्दर बाल कटवा कर उससे घर के सारे काम कराने लगी और खाने में रूखा सूखा देने लगी.बाप के मन में भी उसने सुकेशी के प्रति नफ़रत भर दी.इतने पर भी उसे संतोष नहीं हुआ तो उसने सुकेशी को मरवा कर उसे नदी किनारे दफ़ना दिया.किसी को कानोकान खबर न हुई।
- विधाता का खेल कि कुछ ही दिन बाद उसकी पत्नी काल का शिकार हो गई . लोगों ने समझा-बुझा कर साहूकार का दूसरा ब्याह करवा दिया.सौतेली माता को सुकेशी फूटी आंखों न सुहाती.उसने सुकेशी के सुन्दर बाल कटवा कर उससे घर के सारे काम कराने लगी और खाने में रूखा सूखा देने लगी.बाप के मन में भी उसने सुकेशी के प्रति नफ़रत भर दी.इतने पर भी उसे संतोष नहीं हुआ तो उसने सुकेशी को मरवा कर उसे नदी किनारे दफ़ना दिया.किसी को कानोकान खबर न हुई।
- विधाता का खेल कि कुछ ही दिन बाद उसकी पत्नी काल का शिकार हो गई . लोगों ने समझा-बुझा कर साहूकार का दूसरा ब्याह करवा दिया.सौतेली माता को सुकेशी फूटी आंखों न सुहाती.उसने सुकेशी के सुन्दर बाल कटवा कर उससे घर के सारे काम कराने लगी और खाने में रूखा सूखा देने लगी.बाप के मन में भी उसने सुकेशी के प्रति नफ़रत भर दी.इतने पर भी उसे संतोष नहीं हुआ तो उसने सुकेशी को मरवा कर उसे नदी किनारे दफ़ना दिया.किसी को कानोकान खबर न हुई।
- विधाता का खेल कि कुछ ही दिन बाद उसकी पत्नी काल का शिकार हो गई . लोगों ने समझा-बुझा कर साहूकार का दूसरा ब्याह करवा दिया.सौतेली माता को सुकेशी फूटी आंखों न सुहाती.उसने सुकेशी के सुन्दर बाल कटवा कर उससे घर के सारे काम कराने लगी और खाने में रूखा सूखा देने लगी.बाप के मन में भी उसने सुकेशी के प्रति नफ़रत भर दी.इतने पर भी उसे संतोष नहीं हुआ तो उसने सुकेशी को मरवा कर उसे नदी किनारे दफ़ना दिया.किसी को कानोकान खबर न हुई।