स्वार्थ त्याग का अर्थ
उदाहरण वाक्य
- जिन के प्रेम तथा मोहब्बत , मेहनत और लगन , उनकी सेवा और स्वार्थ त्याग के कारण ही हमने अपने व्यक्तित्व को परवान चढ़ाया है और अल्लाह तआला के बाद हमारे उत्पन्न का कारण भी वह दोनों हैं , इस लिए अल्लाह तथा उस के रसूल के बाद हम पर अपने माता पिता का बड़ा अधिकार और हक़ है।
- अल्लाह तआला फरमाता है - “ و اعبدوا الله و لاتشركوا به شيئا و بالوالدين إحسانا ” [ النساء : 36 ] अर्थः “ और अल्लाह की इबादत करो और उस के साथ किसी को शरीक़ न करो और माँ-बाप के साथ एहसान करो ” इस आयत पर चिंतन मनन करें कि अल्लाह जल्ल शानहु ने अपनी पूजा और उपासना के साथ माता-पिता के साथ उपकार करने का आज्ञा देकर इनसानों को खबरदार किया कि उनके साथ हर प्रकार की भलाई , प्रेम , स्वार्थ त्याग , कृपा का व्यवहार करो।
- अल्लाह तआला फरमाता है - “ و اعبدوا الله و لاتشركوا به شيئا و بالوالدين إحسانا ” [ النساء : 36 ] अर्थः “ और अल्लाह की इबादत करो और उस के साथ किसी को शरीक़ न करो और माँ-बाप के साथ एहसान करो ” इस आयत पर चिंतन मनन करें कि अल्लाह जल्ल शानहु ने अपनी पूजा और उपासना के साथ माता-पिता के साथ उपकार करने का आज्ञा देकर इनसानों को खबरदार किया कि उनके साथ हर प्रकार की भलाई , प्रेम , स्वार्थ त्याग , कृपा का व्यवहार करो।
- मैंने बचपन में एक कहानी पढ़ा था के यदि लकड़ी को अलग अलग बिखेर दे और उसे तोड़े तो वह आसानी से टूट जाएगा लेकिन उसका गठ्ठर बना कर तोड़ना चाहेंगे तो नहीं टूटेगा . जब हम देश के भ्रष्टाचार व काले धन जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर एक होकर आन्दोलन करने के बजाय अलग अलग आन्दोलन कर रहे है तो किया हम मजबूती से मुद्दा उठापाएंगे शायद नहीं.आखिर ऐसी कौन सी बात है की हम एक नहीं हो सकते सिवाए निज स्वार्थ के तो क्या देश हित में हमे अपना निज स्वार्थ त्याग नहीं देना चाहिए.