आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी वाक्य
उच्चारण: [ aachaarey mhaavirepresaad devivedi ]
उदाहरण वाक्य
- आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के प्रोत्साहन से आपने “सरस्वती” में भट्ट जी के साहित्यिक लेख तथा “मर्यादा” और “प्रताप” में आपके राजनीतिक लेख प्रकाशित होते थे।
- जो स्थिति कभी आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के समय सरस्वती की थी, राजेन्द्र जी ने हंस को भी उस स्थिति में ला खड़ा किया था.
- उसी लेख से प्रेरणा लेकर आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने ' सरस्वती ' में एक लेख लिखा और कवियों को उर्मिला का उद्धार करने का आह्वान किया।
- आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के साहित्यिक-सामाजिक अवदान पर पी-एच. डी. की उपाधि. कविता संग्रह ' प्रकीर्णित ' क्रांति मंच प्रकाशन, इलाहाबाद से प्रकाशि त.
- मगर आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी हिन्दी जगत में इसीलिए सफल होगए कि विधाता ने न केवल उनके दुश्मनों को, बल्कि बालों को भी उनके सिर पर नहीं जमने दिया।
- आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने अपने एक पत्र में (2 मार्च, 1938 को म्यामचंद नेगी को लिखित) इन शब्दों में उनकी प्रतिभा को स्वीकार किया था: “स्वर्गवासी पं. सत्यशरण जी रतूड़ी सुकवि थे।
- राजनीतिक पत्रकारिता के क्षेत्र में “ आज ” (1921) और उसके संपादक स्वर्गीय बाबूराव विष्णु पराड़कर का लगभग वही स्थान है जो साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी को प्राप्त है।
- “सरस्वती” के माध्यम से आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी और “इंदु” के माध्यम से पंडित रूपनारायण पांडेय ने जिस संपादकीय सतर्कता, अध्यवसाय और ईमानदारी का आदर्श हमारे सामने रखा वह हमारी पत्रकारित को एक नई दिशा देने में समर्थ हुआ।
- “ सरस्वती ” के माध्यम से आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी और “ इंदु ” के माध्यम से पंडित रूपनारायण पांडेय ने जिस संपादकीय सतर्कता, अध्यवसाय और ईमानदारी का आदर्श हमारे सामने रखा वह हमारी पत्रकारित को एक नई दिशा देने में समर्थ हुआ।