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आचार्य वामन वाक्य

उच्चारण: [ aachaarey vaamen ]

उदाहरण वाक्य

  1. पिछले अंक में आचार्य वामन आदि और परवर्ती आचार्यों के अनुसार काव्य-गुण के भेदों पर चर्चा हुई थी।
  2. ||, || 6. काल-विभाजन ||, ||7.आचार्य भट्टोद्भट ||, || 8. आचार्य वामन ||, || 9. आचार्य रुद्रट और आचार्य रुद्रभट्ट ||
  3. ||, || 6. काल-विभाजन ||, ||7.आचार्य भट्टोद्भट ||, || 8. आचार्य वामन ||, || 9. आचार्य रुद्रट और आचार्य रुद्रभट्ट ||, || 10.
  4. आचार्य वामन ने व्यापक अर्थ को ग्रहण करते हुए संकीर्ण अर्थ की चर्चा के समय अलंकारों को काव्य का शोभाकार धर्म न मानकर उन्हें केवल
  5. क्योंकि महाकवि कल्हण ने अपने महाकाव्य राजतरङ्गिणि में लिखा है कि आचार्य उद्भट महाराज जयादित्य की राजसभा के सभापति थे और आचार्य वामन मंत्री थे।
  6. रुद्र या मेधावी ||, ||4. आचार्य भामह ||, || 5. आचार्य दण्डी ||, || 6. काल-विभाजन ||, ||7.आचार्य भट्टोद्भट ||, || 8. आचार्य वामन ||
  7. काव्य रीति को काव्य की आत्मा मानकर काव्य पर विचार करने वाला एक संप्रदाय रीति संप्रदाय के नाम से विख्यात है जिसके प्रवर्तक आचार्य वामन हैं।
  8. दण्डी ||, || 6. काल-विभाजन ||, ||7.आचार्य भट्टोद्भट ||, || 8. आचार्य वामन ||, || 9. आचार्य रुद्रट और आचार्य रुद्रभट्ट ||, || 10. आचार्य आनन्दवर्धन ||
  9. (3) रीति संप्रदाय के प्रमुख आचार्य वामन (अष्टम शताब्दी का उत्तरार्ध) हैं जिन्होंने अपने “काव्यालंकारसूत्र” में रीति को स्पष्ट शब्दों में काव्य की आत्मा माना है (रीतिरात्मा काव्यस्य)।
  10. आचार्य वामन ने व्यापक अर्थ को ग्रहण करते हुए संकीर्ण अर्थ की चर्चा के समय अलंकारों को काव्य का शोभाकार धर्म न मानकर उन्हें केवल गुणों में अतिशयता लानेवाला हेतु माना (काव्यशोभाया: कर्त्तारो धर्मा गुणा:।
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