उत्तराषाढा वाक्य
उच्चारण: [ utetraasaadhaa ]
उदाहरण वाक्य
- मध्य नाडी = भरनी, मृगशिर, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़, घनिष्ठा, उत्तराभाद्रपद, अत्य नाडी = कृतिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढा, श्रवण, और रेवती.
- राहू का धनुराशी (उत्तराषाढा नक्षत्र) में प्रवेश हो चुका है, जिसके परिणामस्वरूप आगामी 13 दिसंबर 2009 तक भारतवर्ष में कहीं बम विस्फोट, अग्निकाँड, वायुयान दुर्घटना, जातीय / प्रांतीय संघर्ष अथवा उपद्रव होने का योग बन चुका है ।
- अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मॄगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेशा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती ।
- भारतीय ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है. सूर्य से सम्बन्धित नक्षत्र कृतिका उत्तराषाढा और उत्तराफ़ाल्गुनी हैं.यह भचक्र की पांचवीं राशि सिंह का स्वामी है.सूर्य पिता का प्रतिधिनित्व करता है,लकडी मिर्च घास हिरन शेर ऊन स्वर्ण आभूषण तांबा आदि का भी कारक है.मन्दिर सुन्दर महल जंगल किला एवं नदी का किनारा इसका निवास स्थान है.
- भारतीय ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है. सूर्य से सम्बन्धित नक्षत्र कृतिका उत्तराषाढा और उत्तराफ़ाल्गुनी हैं.यह भचक्र की पांचवीं राशि सिंह का स्वामी है.सूर्य पिता का प्रतिधिनित्व करता है,लकडी मिर्च घास हिरन शेर ऊन स्वर्ण आभूषण तांबा आदि का भी कारक है.मन्दिर सुन्दर महल जंगल किला एवं नदी का किनारा इसका निवास स्थान है.
- अनुराधा ज्येष्ठा श्रवण धनिष्ठा रोहिणी मृगशिरा पुनर्वसु पुष्य हस्त उत्तराषाढा रेवती उत्तराफ़ाल्गुनी तथा अश्विनी ये नक्षत्र सिंह कन्या तुला तथा कुम्भ यह लगन जन्म से तीसरा या चौथा महिना यात्रा के लिये शुभ तिथियां तथा शनि और मंगल को छोडकर अन्य सभी दिन, यह सब शिशु को पहली बार घर से बाहर निकलने के लिये शुभ माने गये हैं।
- इस मंत्र को आषाढ मास मे जब उत्तराषाढा नक्षत्र हो तब अर्थात 18 जुलाई २००८ को दिन मे १०८ बार जप ले फिर इसी दिन की रात्रि के समय ११ से १२ बजे के बीच जीभ पर लाल चंदन से ' ह्रीं ' मन्त्र लिख दे जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा, उसे विद्या लाभ तथा विद्वत्ता की प्राप्ति होगी सभी लोग इसका लाभ ले तथा दुसरो को दिलावे अनमोल वचन:-तुम जियो तो ऐसा जियो कि जिसे देखो उसमें बस, अपना आत्मा-ब्रह्म दिखे ऐसा खाओ कि जो खाओ वह प्रसाद हो जाए ।