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दाशरथि वाक्य

उच्चारण: [ daasherthi ]

उदाहरण वाक्य

  1. कबीर की निरंतर बढ़ती ख्याति और लोकप्रियता तथा दाशरथि राम की भगवत्ता को खुल्लम-खुल्ला नकारने की प्रवृत्ति ने गोस्वामी तुलसीदास को सबसे अधिक ठेस पहुँचाई।
  2. यदि ऐसा न होता तो नए सिरे से अतिरिक्त आग्रह के साथ गोस्वामी जी संतों पर ब्राह्मण, दाशरथि राम एवं वेद के प्रति आस्थाशील होने की शर्त न लगाते।
  3. फिर तो दाशरथि राम भार्गव राम की उस परशु शिला को भी भेद गया जिसकी ओट जनक ने वह शिवयंत्र सुरक्षित रखा था जिससे रावण का नाश हो सकता था।
  4. जिस संत के चिंतन के मूल में विप्रपद-प्रेम न हो और जो दाशरथि राम की परब्रह्मता में आस्था न रखता हो (रामचरित मानस, अरण्यकांड ३ ४ / १ तथा उत्तरकाण्ड ३ ८ / ३-४), तुलसी उसे संत मानने के पक्ष में नहीं थे।
  5. क्या यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि दाशरथि राम, सचमुच, जनमे थे और उनके चरित्र पर ही वाल्मीकि ने अपनी रामायण बनायी? इस सम्भावना का खण्डन यह कहने से भी नहीं होता कि वाल्मीकि ने आदि रामायण में केवल अयोध्या-काण्ड से युद्ध-काण्ड तक की ही कथा लिखी थी ; बाल-काण्ड और उत्तर-काण्ड बाद में अन्य कवियों ने मिलाये।
  6. ' ' हा! हा! किया महा-वृक्ष सम दशानन का-भंजन, प्रभंजन समान दाशरथि ने, जिस पर द्विज किया करते बसेरा थे, वासव भी जिसके समक्ष शवमात्र था, मुझ सा अभागा भला होगा कौन भूमि पै जिसने विरोध किया बन्धु का विपत्ति में मर क्यों न गया था मैं हाय! जन्म लेते ही क्षमा कर देना तात! अपने अनुज को।
  7. इनमें प्रमुख हैं-हंसा जाई अकेला (मार्कण्डेय), कोई एक सवार (संतोखसिंह धीर-अनुवादःकेवल गोस्वामी), लंगड़ा कुक्कड़ (बलविंदर सिंह बराड़-पंजाबी से अनुवादःसुभाष नीरव), अजातसुंदरी (मनमोहन बावा), कीर्तिनाश के दो किनारे (सुनील गंगोपाध्याय-अनुवादःलिपिका साहा), नन्द भौजाई की रसोई (तिलोत्तमा मजूमदार-अनुवादःजलज भादुडी), एक अजाने जनपद की उपकथा (जय भद्र-अनुवादःसुशील गुप्ता), झूठी (रमाकांत रथ-अनुवादःसुजाता शिवेन), रूद्रावतार (प्रतिभा राय-अनुवादःराजेन्द्र प्रसाद मिश्र) एवं वही लड़की (दाशरथि भूर्या-अनुवादःरजनी पंडा) ।
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