पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल वाक्य
उच्चारण: [ pitaamebr dett bedethevaal ]
उदाहरण वाक्य
- आप सुमित्रानंदन पंत से शुरू करें और चंद्रकुंवर बर्त्वाल बृजेन्द्र लाल शाह पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल वीरेन डंगवाल को देखें या इनके अलावा और भी कई बड़े नाम हैं जैसे विद्यासागर नौटियाल।
- मूलगोसाईं-चरित के तथ्यों के आधार पर डा ० पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल और श्यामसुंदर दास तथा किसी जनश्रुति के आधार पर ” मानसमयंक '-कार भी १ ५५ ४ का ही समर्थन करते हैं।
- शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किये हैं, उनके अतुलनीय कार्यों का सम्मान करते हुये सरकार द्वारा कोटद्वार के डिग्री कालेज का नाम “डा० पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल राजकीय स्नात्कोत्तर माहाविद्यालय, कोटद्वार” रखा गया है।
- इस संदर्भ में हम यह कहना चाहते हैं कि संतों को डा0 पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल की भांति द्वैत, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत आदि रूपों में वर्गीकृत करने का प्रयास भले ही संगत न हो मगर उनकी अपनी दार्शनिक व्यवस्था के वैशिष्ट्य को समझने का प्रयास होना चाहिये।
- उनकी किताबों में ‘ पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल का जीवन दर्शन और साहित्य साधना ', ‘ गढ़वाल की साहित्यिक विभूतियाँ ', ‘ गढ़वाली लोक साहित्य ' और ‘ लोकोक्तियाँ ' के अतिरिक्त, 11 काव्य संग्रह, 2 उपन्यास, 2 नाटक व 19 एकांकी शामिल हैं।
- पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल, 2 6 हिन्दू धर्म, 3 6 हिन्दी, 4 5 तितली, 5 5 स्वामीनारायण, 6 5 अफ़्रीका, 7 5 इस्लाम, 8 5 भारत, 9 4 सिंह (पशु), 10 4 नाम की व्युत्पत्ति के आधार पर भारत के राज्य, 11 4
- किंतु यह नहीं बताया कि सूफी भक्तों और दरवेशों के पास थी या नहीं? डॉ. द्विवेदी अच्छी तरह जानते थे कि स्वयं रामानंद ने सूफी भक्तों के अनन्य प्रेमसे प्रभावित होकर इसे विशेष मान्यता दी थी. डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल की तो स्पष्ट मान्यता थी और डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी इस से भली प्रकार परिचित भी थे कि ” सूफी मत की विशेषता केवल तपोमय जीवन न होकर परमात्मा के प्रति अनन्य प्रेम भावना है जिस से समस्त संसार उन्हें परमात्मामय मालूम होता है.
- मारग्रेट स्मिथ, ऐन अर्ली मिस्टिक आफ बग़दाद [कैम्ब्रिज 1928], पृ 0 69 (34). डॉ. कल्याणी मल्लिक, सिद्ध सिद्धांत पद्धति एंड द वर्क्स आफ द नाथ योगीज़, [बंबई 1954], पृ 0 7 (35). डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल (सं.) गोरखबानी [प्रयाग 2017 वि.], पृ 0 4-5 (36). डॉ. शशिभूषण दास गुप्त, आब्स्क्योर रेलिजस कल्ट्स, पृ 0 256 (37).