पी.सी. जोशी वाक्य
उच्चारण: [ pi.si. joshi ]
उदाहरण वाक्य
- 377 इसी भारत छोड़ो आन्दोलन में डाँगे, नम्बूदरीपाद और पी.सी. जोशी जैसे कॉमरेड ब्रिटिश साम्राज्य के साथ मिलकर गुप्तचरी कर रहे थे और कांग्रेस के कार्यकत्तर्ााओं का पता बता रहे थे।
- चित्तो बाबू, पी.सी. जोशी के आग्रह पर 1946 में मुम्बई चले आये और स्वाधीनता, जनयुद्ध, पीपुल्स वार जैसे समाचार पत्रों के लिए नाविक विद्रोह तथा महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के चित्र बनाते रहे।
- कामरेडशिप के दिनों, लगभग हर शाम, हम कई-एक कामरेड, पूर्वांचल के लोकप्रिय कम्युनिस्ट नेता सरजू पाण्डेय के आवास पर इकट्ठे होते और तमाम गम्भीर-हँसोड़ चर्चाओं के दौरान यदा-कदा पी.सी. जोशी की चर्चा भी पाण्डेय जी करते।
- श्रीमती ऋतु वर्मा से भिलाई में लिया गया साक्षात्कार 4. पी.सी. जोशी-बदलते संदर्भ उजड़ते लोक-'लोक': पृष्ठ 366 5.श्री रामहृदय तिवारी से दुर्ग में लिया गया साक्षात्कार 6. डॉ. जयप्रकाश-नव औपनिवेशिक शक्तियां और नया यर्थाथ-मड़ई 2008: पृष्ठ 179 7.
- पार्टी द्वारा दरकिनार किये जाने पर वह अपने अकादमिक सरोकारों से जुड़ गये। पी. पी.एच. ने 1857 के शताब्दी वर्ष 1957 में जो मेमोरियल वाल्यूम प्रकाशित किया था उसमें पी.सी. जोशी के दो निबन्ध हैं जो उनकी अकादमिक रुचि, विस्तार और गांभीर्य के द्योतक हैं।
- लेकिन पार्टी की कमजोरी का सबसे जीता-जागता उदाहरण यह तथ्य है कि नवम्बर ' 45 से फरवरी '46 की घटनाओं के बाद ही, पार्टी महासचिव पी.सी. जोशी ने अपने चुनावी परचे में, '' अपनी साझी लज्जा के विरुध्द और साझे गौरव के लिए, कांग्रेस-लीग-कम्युनिस्टों का संयुक्त मोर्चा '' बनाने की भावनात्मक अपील की थी।
- वह रणदिवेवादी उग्रता का दौर था, और उस समय पी.सी. जोशी द्वारा 15 अगस्त, 1947 को 'राजनीतिक आजादी' का दिन बताया जाना और आर्थिक एवं अन्य स्वतंत्रताओं क लिए स्थापित अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय बुर्जुआ तथा सामन्ती गठजोड़ की सत्ता के साथ दृढ़ 'एकता और संघर्ष' की नीति की वकालत किया जाना उस सत्ता का दलाल होना था।
- ुणा द्वारा पर्वतीय क्षेत्र के लिये प्रथक प्रशासनिक इकाई गठित करने की माग की किन्तु इसे उत्तराखण्ड के निवासी एवं तात्कालिक सन्युक्त प्रान्त के मुख्यमन्त्री गोविन्द बल्लभ पन्त ने अस्वीकार कर दिया. १९५२: देश की प्रमुख राजनैतिक दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम महासचिव, पी.सी. जोशी ने भारत सरकार से प्रथक उत्तराखण्ड राज्य गठन करने का एक ग्यापन भारत सरकार को सोपा.
- इसी प्रकार की स्वतंत्राता की इच्छा समाजवादी देशों, मुख्यतः रूस की क्रांति में शामिल थी लेकिन जैसाकि तद्भव में प्रकाशित हो रहे अपने चिन्तन ÷ यादों से रची यात्राा' में प्रख्यात विद्वान पी.सी. जोशी बता रहे हैं कि वहां स्वतंत्राता की अवधारणा में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक स्वतंत्राता का सपना था लेकिन विचारों और भावनाओं की स्वतंत्राता बेदखल कर दी गयी थी।