भारतविद्या वाक्य
उच्चारण: [ bhaaretvideyaa ]
उदाहरण वाक्य
- 1850 से 1920 का कालखण्ड भारतविद्या का शेष विश्व द्वारा किये जाने वाले अध्ययन-अनुसंधान दृष्टिï से स्वर्णकाल कहा जा सकता है।
- 18 शताब्दी के पूर्व भी भारत में रहने वाले कुछ जिज्ञासु पाश्चात्य प्रवासियों एवं मिशनरियों ने भारतविद्या के विषय में थोड़े प्रयास किये।
- जैसा कि ऊपर कहा गया, रामविलास शर्मा की ऐतिहासिक पद्धति पर का गहरा असर है जिसका संबंध भारतविद्या और प्राच्यविद्या से स्पष्ट है।
- भारतविद्या से सम्बद्ध हंगरी के विद्वानों ने भारतीय परंपराओंए संस्कृति और विरासत के बारे में यूरोप की समृद्ध विद्वत्ता में बहुमूल्य योगदान किया है।
- -कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा ‘ आधुनिक विश्व की चुनौतियां: भारतविद्या के माध्यम से समाधान ' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन के अवसर पर, 0 9.04.2013
- भारतविद्या और प्राच्यविद्या में भारत का महानीकरण और प्राच्य समाजों की असभ्यता और बर्बरता की परस्पर विरोधी अवधारणाएं संघर्षरत दिखती हैं जो अक्सर इंग्लैंण्ड की कंजरवेटिव और लिबरल धाराओं की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से भी प्रभावित होती थीं।
- 1785 में भगवद्गीता, 1787 में हितोपदेश,1789 में अभिज्ञानशाकुन्तल, 1792 में ऋतुसंहार और 1794 में मनुस्मृति आदि के अंग्रेजी में भाषान्तर छपजाने से पाश्चात्यजगत के ज्ञान पिपासुओं के समक्ष मानो भारतविद्या स्पष्टïत: प्रत्यक्ष हो गयी ।
- हमने जहाँ एक ओर पाश्चात्त्य पण्डितों को श्री विलयम्स जोंस को ' ओरियण्टल श्री मैग्डॉनल को ' मुग्धानल तथा श्री मैक्समूलर को '' मोक्षमूल जैसे सार्थक अलंकरण नामजद किये वहीं कुछ पाश्चात्य इतिहास लेखकों ने भारत तथा भारतविद्या के विषय में पूर्वाग्रह ग्रस्त तथा दुर्भावनापूर्ण लेखन कार्य किया।
- इसीलिये हमारी समस्त वैदिक मनीषा, प्राचीन ज्ञानराशि तथा मध्यकालिन प्रतिभा के लिये हमने '' इण्डॉलॉजी शब्द को समानार्थी के रूप में '' भारतविद्या कहना ही उचित होगा ॥ यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस महती ज्ञान राशि में समर्पित शोधकार्य की सुदीर्घ मेहनत का श्रेय भी पाश्चात्य जगत को मिलता रहा।
- और ऐसे जबदे हुए काल का “ इमीडिएट सक्सेसर ” होने के नाते 18 वीं-19 वीं सदी के भारत के भाग्य में यही बदा था कि अब वह अपने आप को पहचानने तक के लिए 18 वीं-19 वीं सदी में यूरोप द्वारा रचे जा रहे “ ज्ञान ” और “ भारतविद्या ” का अनुगमन करे।