मरुत् वाक्य
उच्चारण: [ merut ]
उदाहरण वाक्य
- मरुत् आदि के दिव्य रूपों में आकाशचारिणी प्रकृति अपने धूलि के देश और
- मरुत् देवों के सैनिक थे अत: उनके लिये शत्रु पर हमला करना आवश्यक होता था।
- मरुत् विंध्याचल के इस कृत्य पर बड़े कुपित हुए और युद्ध ठानने को तैयार हो गए।
- संगीत के आचार्यों के अनुसार आकाशस्थ अग्नि और मरुत् के संयोग से नाद की उत्पत्ति हुई है ।
- फिर प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विवरणों के आधार पर एक ' मरुत् सखा ' प्रकार के विमान का निर्माण किया।
- अग्नि पुरोहित हैं, इन्द्र क्षत्र है, मरुत् विश है, त्वष्टा को उनके पराभौतिक प्रकृति के कारण शूद्र कहा जा सकता है ।
- आदित्य, मरुत्, देव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, सनकादि मुनि, रंभादि अप्सरायें, इंद्रादि लोकपाल एवं अन्य देवयोनियों वाले शिवगण सेवा में उपस्थित थे।
- वेदों में रुद्र, अग्नि, वरुण, इन्द्र, मरुत् आदि दैव भीषण कहे गये हैं, किन्तु इनमें सर्वाधिक प्रसिद्धि अश्विनी कुमारों की है जो '' देवानां भिषजौ '' के रूप में स्वीकृत हैं ।।
- इतना ही नहीं, महादेवी ने यह भी लक्षित किया है कि विद्रोही आदिकवि की करुणार्द्र दृष्टि के आकर्षण से उषा, मरुत् आदि के दिव्य रूपों में आकाशचारिणी प्रकृति अपने धूलि के देश और तृणों के कुटीर में लौट आई।
- अग्नि, वायु, इंद्र, वरुण, मित्र, अश्विनीकुमार, ऋतु, मरुत् त्वष्टा, सोम, ऋभुः, द्यौः, पृथ्वी, विष्यणु, पूषण, सविता, उषा, आदित्य, यम, रुद्र, सूर्य, बृहस्पति, वाक्, काल, अन्न, वनस्पति, पर्वत, पर्जन्य, धेनु, पितृ, मृत्यु, आत्मा, औषधि, अरण्य, श्रद्धा, शचि, अदिति, हिरण्यगर्भ, विश्वकर्मा, प्रजापति, पुरुष, आपः, श्री सीता, सरस्वती।