वर्धमान नगर वाक्य
उच्चारण: [ verdhemaan negar ]
उदाहरण वाक्य
- उसी वक्त उसे वर्धमान नगर स्थित पेट्रोल पंप के पास कुछ लोगों के घातक शस्त्रों से लैस होकर किसी गंभीर वारदात की फिराक में होने की सूचना मिली।
- पुलिस के मुताबिक उद्योगपति प्रशांत कटारिया के बेटे कुश कटारिया को उस समय अगवा कर लिया गया था, जब वह वर्धमान नगर इलाके में मंगलवार को अपने घर के बाहर खेल रहा था।
- जिसमें बाणसागर के तत्कालीन मुख्य अभियंता बीके त्रिपाठी, एसके पाठक, एमपी चतुर्वेदी, अधीक्षण यंत्री अनुपम कुमार श्रीवास्तव एवं पुन: अधीक्षण यंत्री एमपी चतुर्वेदी के अलावा मे. युनिवर्सल इंजीनियरिंग वर्धमान नगर नागपुर, मे.
- एक 16 साल की नाबालिग लड़की इंदौर के वर्धमान नगर में बलात्कार की शिकार हुई वहीं सागर के एक ज़िला अस्पताल में अपनी बच्ची का इलाज कराने गई एक महिला के साथ तीन सफाई कर्मियों ने सामूहिक बलात्कार किया.
- पुलिस सूत्रों ने बताया कि शहर के लकडगंज थाना क्षेत्र के पॉश इलाके वर्धमान नगर में अपने आप को एक अस्पताल की नर्स मकान मालिक को बताकर सुषमा ने एक माह पहले किराये का मकान लिया और देह व्यापार का अड्डा संचालित करने लगी।
- घोष की धुन के साथ कदम से कदम मिलाते हुए यह पथ संचलन अटाली चक्कली, सेठाराम चौराए, बड़ावास रामदेव मंदिर जलावाला बास मुख्य बस स्टेशन, हरी ओम मार्केट, शिवमंदिर वर्धमान नगर से राधा कृष्ण मन्दिर होता हुआ बालिका आदर्श के विद्यालय पहुंचा।
- बीकानेर. संघर्षरत और विवेकशील व्यापारी के रूप में पहचाने जाने वाले दिनेश गोयल के पारिवारिक जीवन में लगभग पांच महीने पहले ही खुशियों का नया दौर आया था जब उन्होंने वर्धमान नगर में मकान लिया और इसके एक महीने बाद फरवरी में बड़े बेटे अंकित की शादी की।
- श्यामनगर में वर्धमान नगर बी 200 फीट बाइपास निवासी सत्यवीर सुबह 10 बजे परिवार के साथ बाहर गया था पीछे से चोर मकान का ताला तोड़कर अंदर घुसे और अलमारी से सोने का मंगलसूत्र, कानों के टॉप्स सोने की एक अंगूठी, चोरी की चार पायल, चांदी के अन्य आभूषण व 15 हजार रुपए ले गए।
- यह कहकर राक्षसराज अग्निशिख वापस अपने नगर को लौट गया | राक्षस के वहां से जाते ही रूपशिखा ने अपनी माया समेट ली | श्रृंगभुज और घोड़ा पुन: प्रकट हो गए | रूपशिखा भी अपना लकड़हारे का वेश त्यागकर पुन: रूपसी बन गई | घोड़े पर बैठकर दोनों फिर से वर्धमान नगर की ओर चल पड़े |
- यह कथा उस समय की है, जब वर्धमान नगर में राजा वीरभुज का शासन था | राजा वीरभुज को संसार के सभी भौतिक सुख उपलब्ध थे, किंतु संतान न होने का दुख उसे विदग्ध किए रहता था | संतान की लालसा में उसने एक-एक करके सौ विवाह किए थे, किंतु उसकी कोई भी रानी अपनी कोख से राज्य के उत्तराधिकारी को जन्म न दे सकी |