व्याकरण महाभाष्य वाक्य
उच्चारण: [ veyaakern mhaabhaasey ]
उदाहरण वाक्य
- पतंजति ने पाणिनि के ' अष्टाध्यायी ' के कुछ चुने हुए सूत्रों पर भाष्य लिखा था, जिसे ' व्याकरण महाभाष्य ' का नाम दिया गया।
- व्याकरण महाभाष्य का रचना काल ईसा पूर्व द्वितीय शतक, चरक संहिता का संस्करण काल ईसवी द्वितीय शतक और योगसूत्र का ईसवी तृतीय व चतुर्थ शतक है।
- इसमें उन्होंने मनुस्मृति, दार्शनिक सूत्रकारों, पाणिनीय अष्टाध्यायी, व्याकरण महाभाष्य और अन्य आचार्यों के मतों की विशद मीमांसा करते हुए ब्राह्मणों की वेदरूपता का युक्तियुक्त उपपादन किया है।
- इसमें उन्होंने मनुस्मृति, दार्शनिक सूत्रकारों, पाणिनीय अष्टाध्यायी, व्याकरण महाभाष्य और अन्य आचार्यों के मतों की विशद मीमांसा करते हुए ब्राह्मणों की वेदरूपता का युक्तियुक्त उपपादन किया है।
- अन्य दर्शनों के आरम्भ से मेल न रखने वाले परन्तु व्याकरण महाभाष्य के प्रारम्भ से मिलते जुलते इस योगसूत्र के कारण, दोनों ग्रन्थ एक ही लेखक ने लिखे होंगे, ऐसा परम्परा मानती है।
- व्याकरण महाभाष्य के आरम्भ में उसका ' शब्दानुशासन ' नाम से उल्लेख होने पर भी जैसे वह भाष्य से बहिर्भूत नहीं होता, वैसे ही पदार्थ धर्म संग्रह कहने से भी इस ग्रन्थ का भाष्यत्व निरस्त नहीं होता।
- कहीं-कहीं केवल जमींदार, भूमिहार, त्यागी (तगा), महियाल या बाभन अथवा ब्राह्मणादि शब्दों के प्रयोग करने का एक यह भी कारण समझ लेना चाहिए कि ' नामैकदेशेन नामग्रहणम् ' अर्थात ' संपूर्ण यौगिक नाम की जगह उसी अर्थ में उसके एक अंश का प्रयोग भी होता है ', ऐसा व्याकरण महाभाष्य में बहुत जगह लिखा है।