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सन्त नामदेव वाक्य

उच्चारण: [ sent naamedev ]

उदाहरण वाक्य

  1. पहले आप सुनेंगे राग अहीर भैरव के स्वरों में पिरोया सन्त नामदेव का एक भक्तिपद, भारतरत्न पण्डित भीमसेन जोशी के स्वरों में।
  2. अभंग नाम से इस कीर्तन शैली को जनमानस में लोकप्रिय करने का श्रेय दो सन्त कवियों-गायकों, सन्त नामदेव और सन्त ज्ञानेश्वर को प्राप्त है।
  3. विठ्ठल देवता (विठ्ठोबा) की प्रशंसा में गाए जाने वाले इन भजनों को सबसे पहले सन्त नामदेव ने मराठी में गाना शुरू किया था.
  4. सन्त नामदेव ने ‘पाखण्ड भगति राम नही रीझें ' कहकर धर्म के तात्त्विक स्वरूप की ओर ध्यान आकृष्ट किया तो कबीर ने ‘जो घर फूँके आपना, चले हमारे साथ' कहकर
  5. सन्त नामदेव ने ‘पाखण्ड भगति राम नही रीझें ' कहकर धर्म के तात्त्विक स्वरूप की ओर ध्यान आकृष्ट किया तो कबीर ने ‘जो घर फूँके आपना, चले हमारे साथ' कहकर
  6. डॉ. हेमन्त विष्णु इनामदार ने अपनी पुस्तक ‘ सन्त नामदेव ' में यह उल्लेख किया है कि आरम्भ में सन्त नामदेव परमेश्वर के सगुण स्वरुप विठ्ठल के उपासक थे।
  7. डॉ. हेमन्त विष्णु इनामदार ने अपनी पुस्तक ‘ सन्त नामदेव ' में यह उल्लेख किया है कि आरम्भ में सन्त नामदेव परमेश्वर के सगुण स्वरुप विठ्ठल के उपासक थे।
  8. अब सन्त नामदेव उसके पीछे देसी घी का कटोरा लेकर भाग रहे हैं और वे उसमें देख रहै है परम पिता परमात्मा का रुप कह रहै है ” प्रभु रुखी रोटी न खाऔ थोड़ा घी भी लेते जाओ।
  9. सन्त नामदेव ने ‘पाखण्ड भगति राम नही रीझें ' कहकर धर्म के तात्त्विक स्वरूप की ओर ध्यान आकृष्ट किया तो कबीर ने ‘जो घर फूँके आपना, चले हमारे साथ' कहकर साधना-पथ पर द्विधारहित एवं संशयहीन मनःस्थिति से कामनाओं एवं परिग्रहों को त्याग कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
  10. सन्त नामदेव ने ‘पाखण्ड भगति राम नही रीझें ' कहकर धर्म के तात्त्विक स्वरूप की ओर ध्यान आकृष्ट किया तो कबीर ने ‘जो घर फूँके आपना, चले हमारे साथ' कहकर साधना-पथ पर द्विधारहित एवं संशयहीन मनःस्थिति से कामनाओं एवं परिग्रहों को त्याग कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
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