आचार्य कुन्दकुन्द वाक्य
उच्चारण: [ aachaarey kunedkuned ]
उदाहरण वाक्य
- ‘ षट्खंडागम ' के आधार से रचित आचार्य कुन्दकुन्द के ‘ पंचास्तिकाय ', ‘ प्रवचनसार ' आदि आर्ष ग्रन्थों में भी [...]
- आत्मा के त्रैविध की यह चर्चा आचार्य कुन्दकुन्द के ग्रन्थों और पूज्यपाद देवनन्दी के ग्रन्थों से ली गई है और उनका विस्तृत स्वरूप भी दिया है।
- आत्मा के त्रैविध की यह चर्चा आचार्य कुन्दकुन्द के ग्रन्थों और पूज्यपाद देवनन्दी के ग्रन्थों से ली गई है और उनका विस्तृत स्वरूप भी दिया है।
- ' षट्खंडागम ' के आधार से रचित आचार्य कुन्दकुन्द के ' पंचास्तिकाय ', ' प्रवचनसार ' आदि आर्ष ग्रन्थों में भी उनके कुछ और अधिक उद्गमबीज मिलते हैं।
- यहां उल्लेखनीय है कि दिगम्बर जैन परम्परा में आचार्य कुन्दकुन्द एवं आचार्य जिनसेन के पश्चात् 2000 वर्षों के जैन इतिहास में यह पहली घटना है जब किसी ने इतनी कम उम्र में जैन दीक्षा अंगीकार की।
- आचार्य कुन्दकुन्द को श्री गौतम गणधर के बाद एक मात्र संपूर्ण जैन शास्त्रों के ज्ञाता माना गया है| दिगम्बरों के लिए इनके नाम का शुभ महत्त्व है और भगवान महावीर और गौतम गणधर के बाद पवित्र स्तुति में तीसरा स्थान है|
- भगवान राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, ईसा, हजरत मुहम्मदौर आध्यत्मिक साधना के शिखर पुरुष आचार्य कुन्दकुन्द, पूज्यपाद्, मुनि योगिन्दु, शंकराचार्य, संत कबीर, दादू, नानक, बनारसीदास, द्यानतराय तथा महात्मा गाँधी जैसे महामना साधकों की अपनी आत्म-साधना के बल पर स्वतंत्रता और समता के जीवन-मूल्य प्रस्तुत करके सम्पूर्ण मानवता को एक सूत्र में बाँधा है।