आत्म निवेदन वाक्य
उच्चारण: [ aatem niveden ]
उदाहरण वाक्य
- भगवत दुबे जैसे कवि को अपने ऊपर हो रहे शोध आदि का उल्लेख अपने आत्म निवेदन मे करने से बचना चाहिए क्योकि आत्म निवेदन और आत्मश्लाघा मे बहुत फर्क होता है।
- भगवत दुबे जैसे कवि को अपने ऊपर हो रहे शोध आदि का उल्लेख अपने आत्म निवेदन मे करने से बचना चाहिए क्योकि आत्म निवेदन और आत्मश्लाघा मे बहुत फर्क होता है।
- नवधा भक्ति (श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पाद सेवन, अर्चना, वंदना, दास्य, सखा भाव और आत्म निवेदन) के पुष्टि, प्रवाही और मर्यादित भेद से ग्रहण करने से सत्ताईस पक्ष होते हैं।
- एक आत्म निवेदन उनसे लगातार सुनाई देता है मुझे रहने दो ऐसे ही-पेड़ पत्ते कपड़ों के ढेर फ्रीज में सुस्त सी सब्जियां पेन कागज कांच पर जमी धूल और यहाँ तक आंसू भी छलके रहने के लिए बरबस...
- लेकिन कुछ अन्य विद्वान ईश्वर का चिंतन, मनन, आत्म निवेदन, कथा सुनने, कथा कहने, ईश्वर के रूप, उनके गुण, उनकी लीलाओं के स्मरण, प्रार्थना, भजन और जाप को भी नवधा भक्ति कहा है।
- यही नहीं वरन् बड़े-बड़े संन्यासियों ने भी अपने पारम्परिक गेरुए परिधान को त्याग दिया और वे भी प्रिय के रंग में रंग गए-भूलकर अपने पारम्परिक वेश कोआपके रंग में सब रंगे रह गएजिन पे दूजा न चढ़ पाया कोई कभीसारे परिधान थे जो भी संन्यास केगीत के प्रधान गुणों में आत्मभिव्यक्ति और आत्म निवेदन का विशेष महत्व है ।
- यही नहीं वरन् बड़े-बड़े संन्यासियों ने भी अपने पारम्परिक गेरुए परिधान को त्याग दिया और वे भी प्रिय के रंग में रंग गए-भूलकर अपने पारम्परिक वेश को आपके रंग में सब रंगे रह गए जिन पे दूजा न चढ़ पाया कोई कभी सारे परिधान थे जो भी संन्यास के गीत के प्रधान गुणों में आत्मभिव्यक्ति और आत्म निवेदन का विशेष महत्व है ।
- विश्वकोष के अनुसार-“ गति काव्य में विशुद्ध कलात्मक धरातल पर कवि के अंतर्मुखी जीवन का उदघाटन प्रमुख रूप से होता है और उसमे उसके हर्ष-उल्लास, सुख-दुःख एवं विषाद को वाणी प्रदान की जाती हैं ” भारतीय विचारक डा. श्याम सुन्दरदास ने भी ' प्रगीती ' की परिभाषा में आत्माभिव्यन्जना को प्रमुखता देते हुए कहा है-” गीति काव्य के छोटे-छोटे गेय पदों में मधुर भावानापन्न स्वाभाविक आत्म निवेदन रहता है।