गीतारहस्य वाक्य
उच्चारण: [ gaitaarhesy ]
उदाहरण वाक्य
- तिलक ने गीतारहस्य लिखी ही इसलिए थी कि वह मान नहीं पा रहे थे कि गीता जैसी किताब महज मोक्ष की ओर ले जाती है।
- तिलक ने गीतारहस्य लिखी ही इसलिए थी कि वह मान नहीं पा रहे थे कि गीता जैसी किताब महज मोक्ष की ओर ले जाती है।
- तिलक ने गीतारहस्य लिखी ही इसलिए थी कि वह मान नहीं पा रहे थे कि गीता जैसी किताब महज मोक्ष की ओर ले जाती है।
- गीतारहस्य में लिखे अर्थ के बारे में जो कुछ कहा गया है उससे शेष दो अर्थों की भी बहुत कुछ बातों पर प्रकाश पड़ जाता है।
- मराठी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण कृतियों में से ' दासबोध ', ' गीतारहस्य ' और ' महाभारत मीमांसा ' के प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद सप्रेजी ने किये।
- यदि गीतारहस्य में लिखे इस श्लोक का शब्दार्थ पढ़ें तो वहाँ लिखा है कि ' सब धर्मों को छोड़कर तू केवल मेरी ही शरण में आ जा।
- मगर यदि यह भी न मानें और योग का अर्थ वहाँ वही मानें जो गीतारहस्य में माना गया है, तो भी आखिर इससे क्या मतलब निकलता है?
- यदि और नहीं तो गीतारहस्य के ' भक्तिमार्ग ' तथा ' संन्यास और कर्मयोग ' इन दो प्रकरणों को ही पढ़ के और खासकर रहस्य के 358-365 पृष्ठों को ही देख के कोई भी कह सकता है कि उसमें घोर सांप्रदायिकता है।
- तिलक ने गीतारहस्य में साफ ही लिखा है कि ' सभी लोग मानते हैं कि श्रीकृष्ण तथा पांडवों के ऐतिहासिक पुरुष होने में कोई संदेह नहीं है, ' ' चिंतामणिराव वैद्य ने प्रतिपादन किया है कि श्रीकृष्ण, यादव, पांडव तथा भारतीय युद्ध का एक ही काल है।
- परिणाम क्या होगा? यही न, कि गीता में भी वही चीज मानने की ओर उनकी प्रवृत्ति हो जाएगी? अतएव बड़ी मुसीबत और कठिनाई के बाद गीतारहस्य में जो यह सिद्ध करने की कोशिश की गई है कि ज्ञानोत्तर कर्म करते-करते ही मरना गीताधर्म और गीतोपदेश है, उसकी जड़ में ही इस प्रकार कुठाराघात हो जाएगा।